Sun. Jun 14th, 2026

पतित  और पावन इन दोनों शब्दो का यथार्थ अर्थ आजकल कोई भी नही जानते हैं। वैसे तो इन शब्दो का प्रयोग होता ही केवल भारत में है। उनमे भी 90  प्रतिशत लोग जीवन में कभी भी इन शब्दों को इस्तेमाल करते ही नहीं होगें । जो करते हैं वें इतना ही समझते हैं कि पतित वह हैं जो समाज से वर्जित गंदा जीवन बिताता हैं औंर पावन तब हो जाता हैं जब किसी महात्मा से आषीर्वाद प्रसाद पाता हैं

या मंदिरो में पूजा पाठ कराता हैं या विशेष नदियों में नहाता है। पतित व पावन इन शब्दों का भाषांतर यक़ीनन करते हैं। तो प्योर व इम्प्योर बोलते हैं जिसका अर्थ साधारण रुप में शुद्ध व अषुद्ध होता हैं लेकिन पतित वा पावन का अर्थ इतना गहरा हैं कि अन्य कोई भी भाषा में उस का तुलनात्मक शब्द ही नही हैं कुछ लोग सोचते है कि इन बातो को समझना जरुरी है। क्या? हाँ क्योकि सृष्टिनाटक का सार ही इन दो श्ब्दो में समाया हुआ हैं।

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