
पटना : अपर सचिव, डेयर एवं वित्तीय सलाहकार, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद संदीप सरकार ने 31 जुलाई, 2026 को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना का भ्रमण किया। उन्होंने संस्थान की अनुसंधान गतिविधियों, प्रौद्योगिकी विकास तथा वित्तीय प्रबंधन कार्यों की समीक्षा की।
संस्थान के निदेशक डॉ. अनुप दास ने सरकार को संस्थान की उपलब्धियों और संचालित अनुसंधान गतिविधियों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने किसान-केंद्रित, जलवायु-अनुकूल और संसाधन-कुशल कृषि प्रौद्योगिकियों पर प्रकाश डालते हुए संस्थान के प्रमुख कार्यक्रम ‘धान-परती भूमि प्रबंधन’ के साथ समेकित कृषि प्रणाली, स्मार्ट जल प्रबंधन पद्धतियां, पशुधन एवं मत्स्य आधारित मॉड्यूल, बागवानी आधारित भू-उपयोग मॉडल तथा धान–गेहूं प्रणाली के सतत सघनीकरण के माध्यम से पूर्वी भारत में भूमि एवं जल उत्पादकता बढ़ाने और लघु एवं सीमांत किसानों की आजीविका में सुधार की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। उन्होंने यह भी बताया कि संस्थान द्वारा विकसित जलवायु-अनुकूल धान की किस्में अब पूर्वी भारत तथा देश के अन्य हिस्सों में लगभग पांच लाख हेक्टेयर क्षेत्र में उगाई जा रही हैं। संस्थान के योगदान की सराहना करते हुए संदीप सरकार ने कृषि को अधिक टिकाऊ बनाने और किसानों की आय बढ़ाने के लिए अधिक समन्वय, अंतर-संस्थागत सहयोग तथा अनुसंधान परिणामों के व्यापक प्रसार पर जोर दिया।
उन्होंने संस्थान के प्रणाली-आधारित बहुविषयक मॉड्यूल की सराहना करते हुए कहा कि विभिन्न विषयों के बीच अलगाव को समाप्त करने वाले ऐसे समेकित दृष्टिकोण आज की आवश्यकता हैं और राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अनुसंधान किसान-केंद्रित होना चाहिए तथा ऐसी व्यापक रूप से अपनाई जा सकने वाली, स्थान-विशिष्ट और समस्या-समाधान आधारित प्रौद्योगिकियों के विकास पर केंद्रित होना चाहिए, जिनका खेत स्तर पर स्पष्ट प्रभाव दिखाई दे। वित्तीय विवेक के महत्व को रेखांकित करते हुए श्री सरकार ने व्यय में ‘वैल्यू फॉर मनी’, वित्तीय एवं मानव संसाधनों के कुशल उपयोग तथा ऐसे निवेशों को प्राथमिकता देने का आह्वान किया, जिनसे ठोस वैज्ञानिक परिणाम प्राप्त हों। उन्होंने विभिन्न कार्यक्रमों में बेहतर समन्वय, (Gem) जीईएम के माध्यम से खरीद संबंधी नियम और प्रक्रिया के अनुपालन, प्रभावी तकनीकी पर्यवेक्षण, अनुबंध की समयबद्ध निगरानी तथा अधिक सुदृढ़ वित्तीय अनुशासन पर भी बल दिया।
उन्होंने प्रौद्योगिकी के व्यावसायीकरण, सहयोगात्मक अनुसंधान, गुणवत्तापूर्ण बीज उत्पादन तथा अनुसंधान संस्थानों, उद्योग और अन्य हितधारकों के साथ साझेदारी को मजबूत करने के लिए प्रोत्साहित किया, ताकि आईसीएआर की प्रौद्योगिकियों का किसानों तक तेजी से हस्तांतरण सुनिश्चित किया जा सके।पुष्पनायक, मुख्य प्रशासनिक अधिकारी (वरिष्ठ श्रेणी) तथा रजत दास, वित्त एवं लेखा अधिकारी ने श्री सरकार को संस्थान की वित्तीय स्थिति से अवगत कराया। इस अवसर पर कृषि प्रणाली का पहाड़ी एवं पठारी अनुसंधान केन्द्र, रांची तथा कृषि विज्ञान केंद्र, रामगढ़ और बक्सर के वैज्ञानिकों एवं कर्मचारियों ने भी उनके साथ अनुसंधान एवं प्रसार गतिविधियों पर संवाद किया।
इस अवसर पर संदीप सरकार ने प्रायोगिक प्रक्षेत्र, पशुधन इकाइयों, समेकित कृषि प्रणाली मॉडलों तथा ‘स्वर्ण वाटिका नॉलेज पार्क’ का भ्रमण किया और वैज्ञानिकों के साथ प्रौद्योगिकी प्रसार एवं संस्थागत सहयोग से संबंधित विषयों पर चर्चा की। उन्होंने वृक्षारोपण कार्यक्रम में भी भाग लिया तथा संस्थान द्वारा प्रकाशित पुस्तिका का विमोचन भी किया।
