Wed. Jun 24th, 2026

IITके बिल्कुल शुरू गेट निर्माण में जगह को लेकर चल रहे  मतभेद  का एक दृश्य के पश्चात   पटाक्षेप हो गया है। जिला प्रशासन भूमि   मालिक को उसके मरम्मत   में दूसरा  भूमि  आवंटन करेगा । तहसीलदार को इसके  कार्यविधि, जल्द पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। IIT परिसर में प्रवेश के लिए 2  गेट बनाए जाने हैं। जो  मेन गेट धमधा रोड जेवरा सिरसा के  तरफ रहेगा। 2  गेट कोहका साइड में बनाया जाएगा। दोनों ही गेट जिस जगह बनाया जाना है, वह  व्यक्तिगत  संपत्ति   है। संकोच,  दोनों के  व्यवस्था  के जमीन मालिक भूमि देने के लिया  तैयार नहीं था ।

यह मामला कोर्ट तक पहुंच गया। इस बीच मेन गेट जिस जमीन पर बनाया जाना है, उसे देने पर जमीन मालिक एनसी नाहर ने जिला प्रशासन को सहमति दे दी है। वहीं कोहका साइड में बनाए जाने वाले गेट को लेकर मामला कोर्ट में लंबित है। वहीं जमीन मालिक दीपक कुमार साहू व जिला प्रशासन के बीच अब तक समझौता नहीं बन पाए  है। SDMमुकेश रावटे ने बताया कि सहमति बन गए  है।

Spread the love

Leave a Reply

You missed

खेत बचाओ अभियान अंतर्गत भोजपुर जिला के दो गांव में किसानों को दिया प्रशिक्षण भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना द्वारा संचालित “खेत बचाओ अभियान” के अंतर्गत भोजपुर जिले के सहार प्रखंड के दो गांवों में किसानों के लिए जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, फसल सुरक्षा तथा मृदा स्वास्थ्य संरक्षण के प्रति जागरूक करना था। अभियान के अंतर्गत पहला कार्यक्रम धनछुआ गांव, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें कुल 30 किसानों ने भाग लिया। प्रतिभागियों में 27 पुरुष एवं 3 महिला किसान शामिल थीं। वहीं दूसरा कार्यक्रम कोनी गांव, चौरी पंचायत, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें 31 किसानों ने सहभागिता की। प्रशिक्षण कार्यक्रम में आईसीएआर-पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना से विशेषज्ञगण डॉ. पंकज कुमार, डॉ. मनोज कुमार त्रिपाठी तथा श्री ए.एस. महापात्रा मौजूद थे। साथ ही, कृषि विज्ञान केंद्र, आरा के विषय वस्तु विशेषज्ञ डॉ. विकास सिंह मौजूद थे। विशेषज्ञों ने किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का प्रयोग करने से फसलों को आवश्यक पोषक तत्व उचित मात्रा में प्राप्त होते हैं, जिससे उत्पादन लागत कम होती है तथा फसल की उत्पादकता में वृद्धि होती है। उन्होंने रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध उपयोग से बचने तथा एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन अपनाने पर बल दिया। कार्यक्रम के दौरान किसानों को हरित खाद के महत्व से भी अवगत कराया गया। वैज्ञानिकों ने बताया कि धैंचा एवं सनई जैसी फसलों का उपयोग हरित खाद के रूप में करने से मिट्टी में जैविक कार्बन एवं नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ती है, मृदा की संरचना में सुधार होता है तथा भूमि की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहती है। उन्होंने किसानों को खरीफ मौसम में धैंचा एवं सनई की खेती कर उन्हें खेत में पलटने की तकनीक एवं उसके लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम के दौरान किसानों की समस्याओं एवं जिज्ञासाओं का समाधान भी किया गया। किसानों ने प्रशिक्षण कार्यक्रम को अति उपयोगी बता, ऐसी जागरुकता गतिविधियों के निरंतर आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया