Tue. Jun 23rd, 2026

दुर्ग भिलाई  में मंगलवार दोपहर बड़ा हादसा हो गया। जिसमें एक तेज रफ्तार ट्रक ने बाइक सवार को ठोकर मार दी। बाइक ट्रक में बुरी तरह फंस गई थी और काफी दूर तक घिसटती रही। हादसे में बाइक सवार पिता और बेटी  की मौत हो गई। हादसे के बाद ट्रक चालक ट्रक छोड़कर भाग निकला। फिलहाल स्मृति नगर पुलिस उसकी तलाश कर रही है।

पुलिस के मुताबिक सेक्टर-4 भिलाई निवासी वेंकट राव लगभग  46 साल  अपनी बेटी  अंजली राव 22साल  के साथ सबेरे  दुर्ग इंदिरा मार्केट गए थे। दोपहर लगभग  2  बजे के बात हे  दोनों बाइक से वापस लौट कर घर जा रहे थे। बाइपस  ब्रिज पर भिलाई की तरफ उतरते समय पीछे से आ रहे थे  तेज रफ्तार ट्रक ने बाइक को जमके  ठोकर मार दी। इससे बाइक चला रहे वेंकट राव व बेटी अंजली अनियंत्रित बेकाबू होकर गिर पड़े और ट्रक की चपेट के रगड़ में आ गए। प्रत्यक्ष रूप से के हवाले से स्मृति नगर पुलिस चौकी प्रभारी प्रमोद श्रीवास्तव ने बताया कि आरोपित चालक ट्रक को काफी तेज रफ्तार से  चला रहा था। बाइक को सामने देखने के बाद भी वह ट्रक पर काबू नहीं रख सका, और बाइक को ठोकर मार दी। राहगीरों की सूचना पर स्मृति नगर पुलिस मौके पर पहुंची। जेब में मिली  आई  कार्ड जरिया  के आधार पर वेंकट राव व अंजली की पहचान हो पाई। दोनों की मृत शरीर को पोस्टमडम  के लिया  भेजवाया गया है  ।

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खेत बचाओ अभियान अंतर्गत भोजपुर जिला के दो गांव में किसानों को दिया प्रशिक्षण भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना द्वारा संचालित “खेत बचाओ अभियान” के अंतर्गत भोजपुर जिले के सहार प्रखंड के दो गांवों में किसानों के लिए जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, फसल सुरक्षा तथा मृदा स्वास्थ्य संरक्षण के प्रति जागरूक करना था। अभियान के अंतर्गत पहला कार्यक्रम धनछुआ गांव, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें कुल 30 किसानों ने भाग लिया। प्रतिभागियों में 27 पुरुष एवं 3 महिला किसान शामिल थीं। वहीं दूसरा कार्यक्रम कोनी गांव, चौरी पंचायत, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें 31 किसानों ने सहभागिता की। प्रशिक्षण कार्यक्रम में आईसीएआर-पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना से विशेषज्ञगण डॉ. पंकज कुमार, डॉ. मनोज कुमार त्रिपाठी तथा श्री ए.एस. महापात्रा मौजूद थे। साथ ही, कृषि विज्ञान केंद्र, आरा के विषय वस्तु विशेषज्ञ डॉ. विकास सिंह मौजूद थे। विशेषज्ञों ने किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का प्रयोग करने से फसलों को आवश्यक पोषक तत्व उचित मात्रा में प्राप्त होते हैं, जिससे उत्पादन लागत कम होती है तथा फसल की उत्पादकता में वृद्धि होती है। उन्होंने रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध उपयोग से बचने तथा एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन अपनाने पर बल दिया। कार्यक्रम के दौरान किसानों को हरित खाद के महत्व से भी अवगत कराया गया। वैज्ञानिकों ने बताया कि धैंचा एवं सनई जैसी फसलों का उपयोग हरित खाद के रूप में करने से मिट्टी में जैविक कार्बन एवं नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ती है, मृदा की संरचना में सुधार होता है तथा भूमि की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहती है। उन्होंने किसानों को खरीफ मौसम में धैंचा एवं सनई की खेती कर उन्हें खेत में पलटने की तकनीक एवं उसके लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम के दौरान किसानों की समस्याओं एवं जिज्ञासाओं का समाधान भी किया गया। किसानों ने प्रशिक्षण कार्यक्रम को अति उपयोगी बता, ऐसी जागरुकता गतिविधियों के निरंतर आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया