Tue. Jun 23rd, 2026

राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा 20 नवंबर को मध्य प्रदेश पहुचेंगी। कमलनाथ ने निर्दलीय विधायक सुरेंद्र सिंह शेरा को अरुण यादव की जिम्मेदारी सौंपी है। इस पर सियासत भी तेज हो गई है। इसको लेकर शुक्रवार को गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने तंज करते कहा कि हे नाथ यदुवंशियों से इतनी दूरी क्यों!

कांग्रेस की तरफ से निर्दलीय विधायक सुरेंद्र सिंह शेरा को भारत जोड़ो यात्रा का बुरहानुपर और खंडवा जिले में यात्रा की सभी व्यवस्था का प्रभारी नियुक्ति किया है। इसको लेकर संगठन प्रभारी और उपाध्यक्ष चंद्रप्रभाष शेखर ने शेरा को पत्र लिखा है। राहुल गांधी की यात्रा की प्रशासनिक व्यवस्था और मंजूरियों की जिम्मेदारी डॉ. गोविंद सिंह, यात्रा की योजना का काम सुरेश पचौरी, उप यात्राओं के समन्वय का काम अजय सिंह को सौंपा गया है। यात्रा में 9 दिन का समय बचा है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ खुद तैयारियों की मॉनीटरिंग और प्रतिदिन चर्चा कर रहे हैं। राहुल गांधी की यात्रा प्रदेश में 13 दिन में 382 किमी चलेंगी। यात्रा बुरहानुपर से प्रवेश करेंगी और आगर मालवा से राजस्थान में निकल जाएगी।

Spread the love

Leave a Reply

You missed

खेत बचाओ अभियान अंतर्गत भोजपुर जिला के दो गांव में किसानों को दिया प्रशिक्षण भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना द्वारा संचालित “खेत बचाओ अभियान” के अंतर्गत भोजपुर जिले के सहार प्रखंड के दो गांवों में किसानों के लिए जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, फसल सुरक्षा तथा मृदा स्वास्थ्य संरक्षण के प्रति जागरूक करना था। अभियान के अंतर्गत पहला कार्यक्रम धनछुआ गांव, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें कुल 30 किसानों ने भाग लिया। प्रतिभागियों में 27 पुरुष एवं 3 महिला किसान शामिल थीं। वहीं दूसरा कार्यक्रम कोनी गांव, चौरी पंचायत, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें 31 किसानों ने सहभागिता की। प्रशिक्षण कार्यक्रम में आईसीएआर-पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना से विशेषज्ञगण डॉ. पंकज कुमार, डॉ. मनोज कुमार त्रिपाठी तथा श्री ए.एस. महापात्रा मौजूद थे। साथ ही, कृषि विज्ञान केंद्र, आरा के विषय वस्तु विशेषज्ञ डॉ. विकास सिंह मौजूद थे। विशेषज्ञों ने किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का प्रयोग करने से फसलों को आवश्यक पोषक तत्व उचित मात्रा में प्राप्त होते हैं, जिससे उत्पादन लागत कम होती है तथा फसल की उत्पादकता में वृद्धि होती है। उन्होंने रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध उपयोग से बचने तथा एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन अपनाने पर बल दिया। कार्यक्रम के दौरान किसानों को हरित खाद के महत्व से भी अवगत कराया गया। वैज्ञानिकों ने बताया कि धैंचा एवं सनई जैसी फसलों का उपयोग हरित खाद के रूप में करने से मिट्टी में जैविक कार्बन एवं नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ती है, मृदा की संरचना में सुधार होता है तथा भूमि की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहती है। उन्होंने किसानों को खरीफ मौसम में धैंचा एवं सनई की खेती कर उन्हें खेत में पलटने की तकनीक एवं उसके लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम के दौरान किसानों की समस्याओं एवं जिज्ञासाओं का समाधान भी किया गया। किसानों ने प्रशिक्षण कार्यक्रम को अति उपयोगी बता, ऐसी जागरुकता गतिविधियों के निरंतर आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया