Wed. Jun 24th, 2026

पशु के अलाव से लगी आग से 8 घर राख

पश्चिम चम्पारण जिला के योगापट्टी प्रखंड स्थित चौमुखा पंचायत के वार्ड नंबर 2 में पशु के लिए अलाव की आग से 8 घर जलने की खबर है। उपर्युक्त घटना मंगलवार पूर्वाह्न 11 बजे की बतायी गई है। इस घटना में लाखों की सम्पत्ति जलने की खबर है। मिली जानकारी के अनुसार गांव के सुनील यादव के घर में पशु के लिए अलाव से लगी आग की लपट देख लोग भयाक्रांत हो गए। ग्रामीणों ने आग बुझाने का प्रयास किया लेकिन आग की तेज़ लपट होने से तेजी से फैलकर लगभग आधा दर्जन घरों को अपनी आगोश में ले लिया। आगलगी की इस घटना में सुनील यादव, करीमन यादव, लाल साहब यादव, जोगिंदर यादव, लालू यादव समेत आठ लोगों का आशियाना घर तब्दिल ए राख हो गया। सभी अग्नि पीड़ितों के घर में रखे दैनिक उपयोग की सामग्री, खाद्यान्न, वस्त्र, कागजात (दस्तावेज) फर्नीचर व पशु सब कुछ जलकर राख हो गया। आगलगी की सूचना पर मुखिया मुकेन्दर यादव और ग्रामीण आग बुझाने का प्रयास किया। आग बुझाने के क्रम में मुखिया मुकेंद्र यादव आंशिक झुलसने की खबर भी है। वहां के ग्रामीणों के घंटों परिश्रम के बाद आग नियंत्रित कर लिया गया। उपर्युक्त घटना की खबर पर सीओ प्रियव्रत कुमार घटनास्थल पर पहुंचकर अग्नि पीड़ित परिवारों का अवलोकन किया और आपदा राहत दिलाने का आश्वासन दिया।

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By Awadhesh Sharma

न्यूज एन व्यूज फॉर नेशन

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खेत बचाओ अभियान अंतर्गत भोजपुर जिला के दो गांव में किसानों को दिया प्रशिक्षण भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना द्वारा संचालित “खेत बचाओ अभियान” के अंतर्गत भोजपुर जिले के सहार प्रखंड के दो गांवों में किसानों के लिए जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, फसल सुरक्षा तथा मृदा स्वास्थ्य संरक्षण के प्रति जागरूक करना था। अभियान के अंतर्गत पहला कार्यक्रम धनछुआ गांव, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें कुल 30 किसानों ने भाग लिया। प्रतिभागियों में 27 पुरुष एवं 3 महिला किसान शामिल थीं। वहीं दूसरा कार्यक्रम कोनी गांव, चौरी पंचायत, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें 31 किसानों ने सहभागिता की। प्रशिक्षण कार्यक्रम में आईसीएआर-पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना से विशेषज्ञगण डॉ. पंकज कुमार, डॉ. मनोज कुमार त्रिपाठी तथा श्री ए.एस. महापात्रा मौजूद थे। साथ ही, कृषि विज्ञान केंद्र, आरा के विषय वस्तु विशेषज्ञ डॉ. विकास सिंह मौजूद थे। विशेषज्ञों ने किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का प्रयोग करने से फसलों को आवश्यक पोषक तत्व उचित मात्रा में प्राप्त होते हैं, जिससे उत्पादन लागत कम होती है तथा फसल की उत्पादकता में वृद्धि होती है। उन्होंने रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध उपयोग से बचने तथा एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन अपनाने पर बल दिया। कार्यक्रम के दौरान किसानों को हरित खाद के महत्व से भी अवगत कराया गया। वैज्ञानिकों ने बताया कि धैंचा एवं सनई जैसी फसलों का उपयोग हरित खाद के रूप में करने से मिट्टी में जैविक कार्बन एवं नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ती है, मृदा की संरचना में सुधार होता है तथा भूमि की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहती है। उन्होंने किसानों को खरीफ मौसम में धैंचा एवं सनई की खेती कर उन्हें खेत में पलटने की तकनीक एवं उसके लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम के दौरान किसानों की समस्याओं एवं जिज्ञासाओं का समाधान भी किया गया। किसानों ने प्रशिक्षण कार्यक्रम को अति उपयोगी बता, ऐसी जागरुकता गतिविधियों के निरंतर आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया