Wed. Jun 24th, 2026

छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिला  में शिवनाथ नदी ब्रिज स्ट्रीट के ऊपर ज़्यादा रात एक कार चलाने वाले  ने  दो  बाइक सवार  लोगों को ठोकर  मार दिया । ठोकर इतना  रफ्तार  था  कि कार के एक तरफ का हिसा और बाइक बूरी   तरह से विन्यस्त  हो गए। इसमें पीछे बैठे बाइक सवार संदीप आनंदन उम्र 37  मृत्यु हो गए  वहीं बाइक चलाने वाला अल्ताफ गनी उम्र लगभग 25 साल   के हालत गंभीर गहरा, बना  हुआ  है।

दुर्ग के  सीएसपी वैभव बैंकर ने बताया कि उन्हें रविवार रात को करीब 10 बजे सूचना मिला  था  कि शिवनाथ नदी ब्रिज में एक रोड  भयंकर घटना,हुआ  है। अंजोरा के  पुलिस मौके पर पहुंचा  वहां 2 बाइक सवार जख्मी पडा  था । उनके  पहचान वाले  लोग रुआबांधा रहनेवाले  संदीप आनंदन पिता राधे आनंदन और तालपुरी रहनेवाले अल्ताफ गनी पिता नसरुद्दीन के रूप में हुए  है। बाइक को अल्ताफ चला रहा था। वहीं संदीप आनंदन पीछे मे  बैठे हए  थे । इसमें संदीप के सिर में गहरी चोट आने से उसकी मौके पर पही  मृत्यु, हो गए । पुलिस ने दोनों को जिला अस्पताल भेजा, जहां पर डॉक्टरों ने संदीप को मृत घोषित कर दिया गया, वहीं अल्ताफ की हालत गंभीर होने से उसे श्रीशंकराचार्य मेडिकल कॉलेज अस्पताल भेजा गया है। उसके  हालत गंभीर बताया जा रहा  है।

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खेत बचाओ अभियान अंतर्गत भोजपुर जिला के दो गांव में किसानों को दिया प्रशिक्षण भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना द्वारा संचालित “खेत बचाओ अभियान” के अंतर्गत भोजपुर जिले के सहार प्रखंड के दो गांवों में किसानों के लिए जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, फसल सुरक्षा तथा मृदा स्वास्थ्य संरक्षण के प्रति जागरूक करना था। अभियान के अंतर्गत पहला कार्यक्रम धनछुआ गांव, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें कुल 30 किसानों ने भाग लिया। प्रतिभागियों में 27 पुरुष एवं 3 महिला किसान शामिल थीं। वहीं दूसरा कार्यक्रम कोनी गांव, चौरी पंचायत, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें 31 किसानों ने सहभागिता की। प्रशिक्षण कार्यक्रम में आईसीएआर-पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना से विशेषज्ञगण डॉ. पंकज कुमार, डॉ. मनोज कुमार त्रिपाठी तथा श्री ए.एस. महापात्रा मौजूद थे। साथ ही, कृषि विज्ञान केंद्र, आरा के विषय वस्तु विशेषज्ञ डॉ. विकास सिंह मौजूद थे। विशेषज्ञों ने किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का प्रयोग करने से फसलों को आवश्यक पोषक तत्व उचित मात्रा में प्राप्त होते हैं, जिससे उत्पादन लागत कम होती है तथा फसल की उत्पादकता में वृद्धि होती है। उन्होंने रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध उपयोग से बचने तथा एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन अपनाने पर बल दिया। कार्यक्रम के दौरान किसानों को हरित खाद के महत्व से भी अवगत कराया गया। वैज्ञानिकों ने बताया कि धैंचा एवं सनई जैसी फसलों का उपयोग हरित खाद के रूप में करने से मिट्टी में जैविक कार्बन एवं नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ती है, मृदा की संरचना में सुधार होता है तथा भूमि की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहती है। उन्होंने किसानों को खरीफ मौसम में धैंचा एवं सनई की खेती कर उन्हें खेत में पलटने की तकनीक एवं उसके लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम के दौरान किसानों की समस्याओं एवं जिज्ञासाओं का समाधान भी किया गया। किसानों ने प्रशिक्षण कार्यक्रम को अति उपयोगी बता, ऐसी जागरुकता गतिविधियों के निरंतर आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया