Wed. Jun 24th, 2026

बेतिया: पश्चिम चम्पारण जिला के बेतिया पुलिस अंतर्गत चनपटिया थाना क्षेत्र सिरिसिया ओपी क्षेत्र में दिनांक 05 मई 2023 को सरस्वती शिशु मंदिर स्कूल के पास एक युवती को गोली मार कर गंभीर रुप से घायल कर दिया गया। जिसकी चिकित्सा के क्रम में मौत हो गई । इस संदर्भ में चनपटिया (सिरिसिया ओपी) थाना कांड सं 271/23, दिनांक 06 मई 2023 धारा-302 /120बी भादवि एवं 27 आर्म्स एक्ट अंतर्गत अज्ञात के विरुद्ध दर्ज किया गया। कांड का त्वरित उद्भेदन के लिए कि एक टीम का गठन किया गया। जिसके वैज्ञानिक एवं तकनीकी साक्ष्य के आधार पर घटना में संलिप्त युवक गोरख महतो उर्फ रामप्रवेश कुमार, उम्र 24 वर्ष, पे
रघुवीर महतो, सिरिसिया विश्वास, वार्ड नंबर 04, थाना सिरिसिया ओपी जिला पश्चिम चम्पारण को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। पुलिस की छापामारी दल में पुअनि विकास तिवारी अध्यक्ष सिरिसिया ओपी बेतिया, पुअनि करवेन्द्र पासवान, सिरिसिया ओपी बेतिया एवं थाना रिजर्व गार्ड, सिरिसिया ओपी बेतिया शामिल रहे।

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By Awadhesh Sharma

न्यूज एन व्यूज फॉर नेशन

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खेत बचाओ अभियान अंतर्गत भोजपुर जिला के दो गांव में किसानों को दिया प्रशिक्षण भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना द्वारा संचालित “खेत बचाओ अभियान” के अंतर्गत भोजपुर जिले के सहार प्रखंड के दो गांवों में किसानों के लिए जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, फसल सुरक्षा तथा मृदा स्वास्थ्य संरक्षण के प्रति जागरूक करना था। अभियान के अंतर्गत पहला कार्यक्रम धनछुआ गांव, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें कुल 30 किसानों ने भाग लिया। प्रतिभागियों में 27 पुरुष एवं 3 महिला किसान शामिल थीं। वहीं दूसरा कार्यक्रम कोनी गांव, चौरी पंचायत, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें 31 किसानों ने सहभागिता की। प्रशिक्षण कार्यक्रम में आईसीएआर-पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना से विशेषज्ञगण डॉ. पंकज कुमार, डॉ. मनोज कुमार त्रिपाठी तथा श्री ए.एस. महापात्रा मौजूद थे। साथ ही, कृषि विज्ञान केंद्र, आरा के विषय वस्तु विशेषज्ञ डॉ. विकास सिंह मौजूद थे। विशेषज्ञों ने किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का प्रयोग करने से फसलों को आवश्यक पोषक तत्व उचित मात्रा में प्राप्त होते हैं, जिससे उत्पादन लागत कम होती है तथा फसल की उत्पादकता में वृद्धि होती है। उन्होंने रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध उपयोग से बचने तथा एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन अपनाने पर बल दिया। कार्यक्रम के दौरान किसानों को हरित खाद के महत्व से भी अवगत कराया गया। वैज्ञानिकों ने बताया कि धैंचा एवं सनई जैसी फसलों का उपयोग हरित खाद के रूप में करने से मिट्टी में जैविक कार्बन एवं नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ती है, मृदा की संरचना में सुधार होता है तथा भूमि की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहती है। उन्होंने किसानों को खरीफ मौसम में धैंचा एवं सनई की खेती कर उन्हें खेत में पलटने की तकनीक एवं उसके लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम के दौरान किसानों की समस्याओं एवं जिज्ञासाओं का समाधान भी किया गया। किसानों ने प्रशिक्षण कार्यक्रम को अति उपयोगी बता, ऐसी जागरुकता गतिविधियों के निरंतर आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया