Wed. Jun 24th, 2026

1 मई को एक अनपढ़ निरक्षर, ठग ने एमटेक इंजीनियर से KYCनवीनीकरण   करने के नाम पर लगभग  सवा दो लाख रुपए  ठगा है । जब यह घटना दुर्ग एसपी के विचाराधिकार में आया तो उन्होंने पीड़ित को पुलिस कंट्रोल रूम बुलाया और ठगी का लाइव डेमो किया। एमटेक इंजीनियर ने बताया की इस तरह के  छोटे -छोटे  गलती के  वजह से उसके अकाउंट से 10-12 मिनट के अंदर लाखों रुपए निकाल लिया ।

तालपुरी A-ब्लाक रुआबान्धा रहनेवाला गौरव रॉय एमटेक इंजीनियर है। वो मारुती सुजुकी भाटागांव रायपुर में एडवाइजर के पोस्ट पर काम करता है। उसने बताया कि वो काफी दिनों से अपने पैन कार्ड का केवायसी अपडेट करना चाह रहा था। 1 मई की दोपहर करीब 2 उसके मोबाइल पर एक फोन आया। कॉल करने वाले ने खुद को एसबीआई का कार्यकर्त्ता बताते हुए कहा कि अगर उसका केवायसी अपडेट नहीं हुआ  तो उसका खाता  बंद हो जाएगा।

इसके बाद उसने उसके नंबर पर एक लिंक भेजा और केवायसी अपडेट करने के लिए कहा। गौरव डर गया और जल्दबाजी में केवायसी अपडेट करने के लिए उस लिंक को खोला। लिंक खोलने के बाद पहले उसका पैन कार्ड नंबर मांगा और फिर O T P  भेजा इसके बाद आधार कार्ड नंबर और उसका  । गौरव ने जैसे ही दोनों O T P  बताए, सामने वाले ने फोन काट दिया। थोड़ी देर बाद गौरव के मोबाइल पर मैसेज आया कि उसके खाते से 2.25 लाख निकाल ली गई है। इसके बाद उसने तुरंत मामले की शिकायत भिलाई नगर थाने में दर्ज कराया ।

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खेत बचाओ अभियान अंतर्गत भोजपुर जिला के दो गांव में किसानों को दिया प्रशिक्षण भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना द्वारा संचालित “खेत बचाओ अभियान” के अंतर्गत भोजपुर जिले के सहार प्रखंड के दो गांवों में किसानों के लिए जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, फसल सुरक्षा तथा मृदा स्वास्थ्य संरक्षण के प्रति जागरूक करना था। अभियान के अंतर्गत पहला कार्यक्रम धनछुआ गांव, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें कुल 30 किसानों ने भाग लिया। प्रतिभागियों में 27 पुरुष एवं 3 महिला किसान शामिल थीं। वहीं दूसरा कार्यक्रम कोनी गांव, चौरी पंचायत, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें 31 किसानों ने सहभागिता की। प्रशिक्षण कार्यक्रम में आईसीएआर-पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना से विशेषज्ञगण डॉ. पंकज कुमार, डॉ. मनोज कुमार त्रिपाठी तथा श्री ए.एस. महापात्रा मौजूद थे। साथ ही, कृषि विज्ञान केंद्र, आरा के विषय वस्तु विशेषज्ञ डॉ. विकास सिंह मौजूद थे। विशेषज्ञों ने किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का प्रयोग करने से फसलों को आवश्यक पोषक तत्व उचित मात्रा में प्राप्त होते हैं, जिससे उत्पादन लागत कम होती है तथा फसल की उत्पादकता में वृद्धि होती है। उन्होंने रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध उपयोग से बचने तथा एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन अपनाने पर बल दिया। कार्यक्रम के दौरान किसानों को हरित खाद के महत्व से भी अवगत कराया गया। वैज्ञानिकों ने बताया कि धैंचा एवं सनई जैसी फसलों का उपयोग हरित खाद के रूप में करने से मिट्टी में जैविक कार्बन एवं नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ती है, मृदा की संरचना में सुधार होता है तथा भूमि की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहती है। उन्होंने किसानों को खरीफ मौसम में धैंचा एवं सनई की खेती कर उन्हें खेत में पलटने की तकनीक एवं उसके लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम के दौरान किसानों की समस्याओं एवं जिज्ञासाओं का समाधान भी किया गया। किसानों ने प्रशिक्षण कार्यक्रम को अति उपयोगी बता, ऐसी जागरुकता गतिविधियों के निरंतर आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया