Tue. Jun 23rd, 2026

 

जिला जनसंपर्क कार्यालय पश्चिम चम्पारण ने खंडन प्रकाशन के लिए विज्ञप्ति जारी किया है

बेतिया। पश्चिम चम्पारण जिला अंतर्गत वाल्मीकिनगर टाइगर रिजर्व क्षेत्र में मदनपुर के समीप जंगल में आग लगने से अफरातफरी मची है तथा नुकसान भी हुई है।उपर्युक्त लेक्ट्रॉनिक मीडिया न्यूज 18 में आज संध्या यह खबरka वाल्मीकिनगर टाइगर रिजर्व क्षेत्र अंतर्गत मदनपुर के समीप जंगल में आग लगने से अफरातफरी मची है तथा नुकसान भी हुआ है। ज्ञातव्य हो कि वीटीआर के कुछ हिस्सा में आज दोपहर आग लगी , जिसे तत्परतापूर्वक वनकर्मियों की मदद से बुझा दिया गया। किसी भी तरह की जानमाल की क्षति नहीं हुई है। डीएफओ द्वारा बताया गया कि दोपहर तक आग पर पूरी तरह से काबू पाकर नियंत्रित कर लिया गया है। इसमें किसी भी तरह की जानमाल की क्षति नहीं हुई है। वनकर्मियों को पूरी तरह से मुस्तैद रहने को कहा गया है ताकि किसी कारणवश अगलगी की घटना हो तो उसे त्वरित गति से बुझाया जा सके।

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By Awadhesh Sharma

न्यूज एन व्यूज फॉर नेशन

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खेत बचाओ अभियान अंतर्गत भोजपुर जिला के दो गांव में किसानों को दिया प्रशिक्षण भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना द्वारा संचालित “खेत बचाओ अभियान” के अंतर्गत भोजपुर जिले के सहार प्रखंड के दो गांवों में किसानों के लिए जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, फसल सुरक्षा तथा मृदा स्वास्थ्य संरक्षण के प्रति जागरूक करना था। अभियान के अंतर्गत पहला कार्यक्रम धनछुआ गांव, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें कुल 30 किसानों ने भाग लिया। प्रतिभागियों में 27 पुरुष एवं 3 महिला किसान शामिल थीं। वहीं दूसरा कार्यक्रम कोनी गांव, चौरी पंचायत, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें 31 किसानों ने सहभागिता की। प्रशिक्षण कार्यक्रम में आईसीएआर-पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना से विशेषज्ञगण डॉ. पंकज कुमार, डॉ. मनोज कुमार त्रिपाठी तथा श्री ए.एस. महापात्रा मौजूद थे। साथ ही, कृषि विज्ञान केंद्र, आरा के विषय वस्तु विशेषज्ञ डॉ. विकास सिंह मौजूद थे। विशेषज्ञों ने किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का प्रयोग करने से फसलों को आवश्यक पोषक तत्व उचित मात्रा में प्राप्त होते हैं, जिससे उत्पादन लागत कम होती है तथा फसल की उत्पादकता में वृद्धि होती है। उन्होंने रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध उपयोग से बचने तथा एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन अपनाने पर बल दिया। कार्यक्रम के दौरान किसानों को हरित खाद के महत्व से भी अवगत कराया गया। वैज्ञानिकों ने बताया कि धैंचा एवं सनई जैसी फसलों का उपयोग हरित खाद के रूप में करने से मिट्टी में जैविक कार्बन एवं नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ती है, मृदा की संरचना में सुधार होता है तथा भूमि की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहती है। उन्होंने किसानों को खरीफ मौसम में धैंचा एवं सनई की खेती कर उन्हें खेत में पलटने की तकनीक एवं उसके लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम के दौरान किसानों की समस्याओं एवं जिज्ञासाओं का समाधान भी किया गया। किसानों ने प्रशिक्षण कार्यक्रम को अति उपयोगी बता, ऐसी जागरुकता गतिविधियों के निरंतर आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया