Tue. Jun 23rd, 2026

केंद्रीय गोड़ महासभ धमधागढ़ द्वारा त्रिमुर्ति महामाया व बंढ़ादेव मंदिर किला परिसर धमधा में आयोजित दों दिवसीय अधिवेशन का समापन गुरुवार को हुगा। इसमें प्रदेशभर से गोड़ समाज के प्रतिनिधि शामिल हुए। समाज के वरिष्ठों ने बताया कि कंेद्रीय गोड महासभा का कार्यकाल कोरोनाकाल के पूर्व समाप्त हो चुका है। सामाजिक बाँयलाज के अनुसार कार्यक्रम होना था

लेकिन इन विषयों पर केंद्रीय अध्यक्ष को आर्थिक समाजिक व न्यायिक कार्यो में असफल पाया गया। कार्यक्रम में वे अन्य पदाधिकारियांे समेंत उपस्थित नही थे। समाज नें आक्रोश जताया। इसे देखते हुए समाज प्रमुखों ने केंद्रीय पदाधिकारियों के कार्यकाल को भंग किया और निर्णय लिया गया कि नए केंद्रीय अध्यक्ष व पदाधिकारियों का चुनाव गोड़वाना की वीरांगना रानी दंर्गावती के शहादत दिवस पर 24 जून को कराया जाएगा। कार्यक्रम में पेंड्रा गोरेल्ला जिला से आई डाँ उर्मिला मार्को ने समाज की महिलाओं को संगठित होने का आह्वान किया। केद्रीय चुनाव में महिलाओं को बराबर भागीदारी पर जोर दिया।

Spread the love

Leave a Reply

You missed

खेत बचाओ अभियान अंतर्गत भोजपुर जिला के दो गांव में किसानों को दिया प्रशिक्षण भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना द्वारा संचालित “खेत बचाओ अभियान” के अंतर्गत भोजपुर जिले के सहार प्रखंड के दो गांवों में किसानों के लिए जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, फसल सुरक्षा तथा मृदा स्वास्थ्य संरक्षण के प्रति जागरूक करना था। अभियान के अंतर्गत पहला कार्यक्रम धनछुआ गांव, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें कुल 30 किसानों ने भाग लिया। प्रतिभागियों में 27 पुरुष एवं 3 महिला किसान शामिल थीं। वहीं दूसरा कार्यक्रम कोनी गांव, चौरी पंचायत, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें 31 किसानों ने सहभागिता की। प्रशिक्षण कार्यक्रम में आईसीएआर-पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना से विशेषज्ञगण डॉ. पंकज कुमार, डॉ. मनोज कुमार त्रिपाठी तथा श्री ए.एस. महापात्रा मौजूद थे। साथ ही, कृषि विज्ञान केंद्र, आरा के विषय वस्तु विशेषज्ञ डॉ. विकास सिंह मौजूद थे। विशेषज्ञों ने किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का प्रयोग करने से फसलों को आवश्यक पोषक तत्व उचित मात्रा में प्राप्त होते हैं, जिससे उत्पादन लागत कम होती है तथा फसल की उत्पादकता में वृद्धि होती है। उन्होंने रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध उपयोग से बचने तथा एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन अपनाने पर बल दिया। कार्यक्रम के दौरान किसानों को हरित खाद के महत्व से भी अवगत कराया गया। वैज्ञानिकों ने बताया कि धैंचा एवं सनई जैसी फसलों का उपयोग हरित खाद के रूप में करने से मिट्टी में जैविक कार्बन एवं नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ती है, मृदा की संरचना में सुधार होता है तथा भूमि की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहती है। उन्होंने किसानों को खरीफ मौसम में धैंचा एवं सनई की खेती कर उन्हें खेत में पलटने की तकनीक एवं उसके लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम के दौरान किसानों की समस्याओं एवं जिज्ञासाओं का समाधान भी किया गया। किसानों ने प्रशिक्षण कार्यक्रम को अति उपयोगी बता, ऐसी जागरुकता गतिविधियों के निरंतर आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया