Tue. Jun 23rd, 2026

पटना: पंडित राजकुमार शुक्ल स्मृति सम्मान 2022 सह लोक चिन्तन स्थापना दिवस समारोह बिहार की राजधानी पटना स्थित गांधी संग्रहालय में समारोह पूर्वक संपन्न हुआ। जिसकी अध्यक्षता रवींद्र कुमार शर्मा संपादक लोकचिंतन एवं पंडित राजकुमार शुक्ल स्मारक समिति के अध्यक्ष ने की। सम्मान समारोह के मुख्य अतिथि विधान परिषद के उप सभापति डॉ रामचंद्र पूर्वे रहे। समारोह का मंच संचालन मेरी आडलीन और अजीत कुमार सिंह ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन अजीत कुमार शुक्ल ने किया। कार्यक्रम का शुभारंभ पण्डित राजकुमार शुक्ल की गांधी संग्रहालय में अवस्थित प्रतिमा पर माल्यार्पण से किया गया। इस क्रम में अजय कुमार चौधरी, नागेंद्रनाथ तिवारी, रविकांत झा, प्रेम कुमार दास, मुनेश कुमार सिन्हा एवं अमरेश कुमार ने माल्यार्पण कर सम्मान समारोह का आगाज़ किया। पण्डित राजकुमार शुक्ल स्मृति सम्मान एवं लोक चिंतन विशेष सेवा सम्मान से 151 व्यक्ति सम्मानित किया गया। जिसमें वरीय पत्रकार अवधेश कुमार शर्मा को पण्डित राजकुमार शुक्ल स्मृति सम्मान 2022 से सम्मानित किया गया। विशिष्ट अतिथियों में सत्यनारायण अध्यक्ष बिहार हिंदी प्रगति समिति, विनीता बिट्टू सिंह एवं पूर्व विधायक विभूति कवि ने संबोधित किया।

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By Awadhesh Sharma

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खेत बचाओ अभियान अंतर्गत भोजपुर जिला के दो गांव में किसानों को दिया प्रशिक्षण भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना द्वारा संचालित “खेत बचाओ अभियान” के अंतर्गत भोजपुर जिले के सहार प्रखंड के दो गांवों में किसानों के लिए जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, फसल सुरक्षा तथा मृदा स्वास्थ्य संरक्षण के प्रति जागरूक करना था। अभियान के अंतर्गत पहला कार्यक्रम धनछुआ गांव, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें कुल 30 किसानों ने भाग लिया। प्रतिभागियों में 27 पुरुष एवं 3 महिला किसान शामिल थीं। वहीं दूसरा कार्यक्रम कोनी गांव, चौरी पंचायत, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें 31 किसानों ने सहभागिता की। प्रशिक्षण कार्यक्रम में आईसीएआर-पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना से विशेषज्ञगण डॉ. पंकज कुमार, डॉ. मनोज कुमार त्रिपाठी तथा श्री ए.एस. महापात्रा मौजूद थे। साथ ही, कृषि विज्ञान केंद्र, आरा के विषय वस्तु विशेषज्ञ डॉ. विकास सिंह मौजूद थे। विशेषज्ञों ने किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का प्रयोग करने से फसलों को आवश्यक पोषक तत्व उचित मात्रा में प्राप्त होते हैं, जिससे उत्पादन लागत कम होती है तथा फसल की उत्पादकता में वृद्धि होती है। उन्होंने रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध उपयोग से बचने तथा एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन अपनाने पर बल दिया। कार्यक्रम के दौरान किसानों को हरित खाद के महत्व से भी अवगत कराया गया। वैज्ञानिकों ने बताया कि धैंचा एवं सनई जैसी फसलों का उपयोग हरित खाद के रूप में करने से मिट्टी में जैविक कार्बन एवं नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ती है, मृदा की संरचना में सुधार होता है तथा भूमि की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहती है। उन्होंने किसानों को खरीफ मौसम में धैंचा एवं सनई की खेती कर उन्हें खेत में पलटने की तकनीक एवं उसके लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम के दौरान किसानों की समस्याओं एवं जिज्ञासाओं का समाधान भी किया गया। किसानों ने प्रशिक्षण कार्यक्रम को अति उपयोगी बता, ऐसी जागरुकता गतिविधियों के निरंतर आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया