Tue. Jun 23rd, 2026

बेतिया: पश्चिम चम्पारण जिला मुख्यालय बेतिया स्थित समाहरणालय सभागार में राष्ट्रीय प्रेस दिवस पर एक संगोष्ठी आयोजित की गई। जिसमें जिला के सैकड़ों प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक, वेब एवं सोसल मीडिया के पत्रकार एवं वरीय पदाधिकारी शामिल हुए। इस संगोष्ठी का शुभारंभ वरीय पत्रकार मोहन सिंह और जिला पदाधिकारी कुंदन कुमार ने दीप प्रज्वलित कर किया। प्रेस दिवस पर आयोजित संगोष्ठी का मुख्य विषय ‘राष्ट्र निर्माण में प्रेस की भूमिका’ रही। संगोष्ठी में शामिल पत्रकारों ने उपर्युक्त विषय पर उपर्युक्त विषयक विचार व्यक्त किया। राष्ट्रीय खबर समाचार पत्र के प्रतिनिधि विनय कुमार ने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि मजबूत राष्ट्र निर्माण में प्रेस की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। इसलिए प्रेस की आजादी बनी रहे, पत्रकार के कार्यों में पदाधिकारियों की दखलअंदाजी नहीं, बल्कि सहयोगात्मक रवैया अपनाने की आवश्यकता है। कौमी तंजीम के ब्यूरो चीफ डॉ अमानुल हक ने प्रेस की स्वतंत्रता और मीडिया कर्मियों की सुविधा पर भी पर ध्यान देने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने प्रेस क्लब के लिए बना भवन पत्रकारों को सुपुर्द करने की मांग भी किया। उन्होंने बताया पिछले प्रेस दिवस पर भी हम लोगों ने जिला पदाधिकारी से यह मांग किया कि प्रेस क्लब भवन के पत्रकारों के लिए निर्मित है उसे मीडियाकर्मियों को सौंपी किया जाए। जिससे संवाद संकलन तथा मीडिया के अन्य नियमित गतिविधियों का संचालन व निष्पादन किया जा सके। सन्मार्ग अखबार के प्रतिनिधि संजय राव ने बताया के हम बहुत परिश्रम कर संवाद संकलन करते हैं, जिसमें हमारा काफी ऊर्जा लगती है लेकिन समस्यात्मक खबरों पर पदाधिकारियों की कोई कार्रवाई नहीं होती तो हमें काफी दुख होता है। जिला पदाधिकारी कुंदन कुमार ने संगोष्ठी में बोलने वाले मीडिया प्रतिनिधियों की बातों को ध्यान से सुना और बारी बारी से सबका जवाब भी दिया। अच्छे पत्रकारिता के लिए पॉजिटिव सोच रखकर काम करने की परामर्श दिया। उन्होंने बताया कि सकारात्मक सोच के साथ किया गया हर कार्य अच्छा और मजबूत होता है। अपर समाहर्ता ने प्रेस प्रतिनिधियों से आग्रह किया, कि जो विकास के कार्य प्रशासन नहीं पहुंचती उससे मीडिया के बंधु हम तक अवश्य पहुंचाए, जिससे कोई भी विकास का कार्य अनसुलझा ना रहे। पत्रकारों को निर्भीक होकर अपना कार्य करना चाहिए, जिसमें प्रशासन का सहयोग अवश्य मिलेगा। जिला जन सूचना संपर्क पदाधिकारी ने सभी प्रेस प्रतिनिधियों को धन्यवाद दिया और बधाई देते हुए आभार व्यक्त किया।

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By Awadhesh Sharma

न्यूज एन व्यूज फॉर नेशन

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खेत बचाओ अभियान अंतर्गत भोजपुर जिला के दो गांव में किसानों को दिया प्रशिक्षण भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना द्वारा संचालित “खेत बचाओ अभियान” के अंतर्गत भोजपुर जिले के सहार प्रखंड के दो गांवों में किसानों के लिए जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, फसल सुरक्षा तथा मृदा स्वास्थ्य संरक्षण के प्रति जागरूक करना था। अभियान के अंतर्गत पहला कार्यक्रम धनछुआ गांव, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें कुल 30 किसानों ने भाग लिया। प्रतिभागियों में 27 पुरुष एवं 3 महिला किसान शामिल थीं। वहीं दूसरा कार्यक्रम कोनी गांव, चौरी पंचायत, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें 31 किसानों ने सहभागिता की। प्रशिक्षण कार्यक्रम में आईसीएआर-पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना से विशेषज्ञगण डॉ. पंकज कुमार, डॉ. मनोज कुमार त्रिपाठी तथा श्री ए.एस. महापात्रा मौजूद थे। साथ ही, कृषि विज्ञान केंद्र, आरा के विषय वस्तु विशेषज्ञ डॉ. विकास सिंह मौजूद थे। विशेषज्ञों ने किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का प्रयोग करने से फसलों को आवश्यक पोषक तत्व उचित मात्रा में प्राप्त होते हैं, जिससे उत्पादन लागत कम होती है तथा फसल की उत्पादकता में वृद्धि होती है। उन्होंने रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध उपयोग से बचने तथा एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन अपनाने पर बल दिया। कार्यक्रम के दौरान किसानों को हरित खाद के महत्व से भी अवगत कराया गया। वैज्ञानिकों ने बताया कि धैंचा एवं सनई जैसी फसलों का उपयोग हरित खाद के रूप में करने से मिट्टी में जैविक कार्बन एवं नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ती है, मृदा की संरचना में सुधार होता है तथा भूमि की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहती है। उन्होंने किसानों को खरीफ मौसम में धैंचा एवं सनई की खेती कर उन्हें खेत में पलटने की तकनीक एवं उसके लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम के दौरान किसानों की समस्याओं एवं जिज्ञासाओं का समाधान भी किया गया। किसानों ने प्रशिक्षण कार्यक्रम को अति उपयोगी बता, ऐसी जागरुकता गतिविधियों के निरंतर आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया