Tue. Jun 23rd, 2026

राहुल गांधी का भारत जोड़ो यात्रा इस माह मध्य प्रदेश की सीमा में प्रवेश करेगा । किस जिले में कितने दिन यात्रा रुकेगी, कहां आम सभा होगी। इसका खाका तैयार हो रहा है। कांग्रेस भले ही यह कहे कि इस यात्रा को राजनीति से जोड़कर न देखे। यह यात्रा भारत जोड़ने के लिए निकाली जा रहा है, लेकिन जिस तरह से यात्रा को लेकर फेरबदल हो रहे है। उससे साफ है कि यात्रा में राजनीतिक नफा नुकसान भी देखे जा रहे हैं। निमाड़ में खुद को कांग्रेस मजबूत मानकर चल रहा है, इसलिए खरगोन जिले का विधानसभा सीटों के ज्यादा हिस्सों को यात्रा में शामिल नहीं किया गया है।

4 दिन पहले यह सुगबुगाहट भी थी कि राहुल गांधी मध्य प्रदेश में यात्रा को रोककर गुजरात जा सकते है। वहां विधानसभा चुनाव हो रहे है, लेकिन इसकी संभावना नजर नहीं आ रही है। कांग्रेस नेत्री शोभा ओझा के अनुसार कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष डीके शिवकुमार यात्रा की तैयारियों के सिलसिले में इंदौर आए थे। इंदौर संभाग की यात्रा का प्लान लगभग तैयार हो चुका है। इसमें इंदौर संभाग में यात्रा ज्यादा समय तक रोके जाने की योजना नहीं है। यदि राहुल गाधी गुजरात जाते तो फिर यहां यात्रा रोकने के लिए वैसी तैयारियां पहले से की जाती है और कांग्रेस इन सीटों पर पिछले विधानसभा चुनाव की तरह कब्जा बरकरार रखना चाहती है, इसलिए राहुल महू क्षेत्र को ज्यादा समय दे रहे है। इंदौर मालवा निमाड़ क्षेत्र का सबसे बड़ा शहर है और ज्यादातर बड़ी राजनीतिक आमसभाएं इंदौर में होती है, लेकिन इस बार राहुल गांधी की आम सभा के लिए इंदौर के बजाए उज्जैन को चुना गया है, ताकि उज्जैन की छह सीटों पर भी कांग्रेस को अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में राजनीतिक लाभ मिल सके। फिलहाल छह में से तीन सीटें कांग्रेस के पास है। इंदौर में सिर्फ नुक्कड सभा होगी। राहुल गांधी पहले खालसा स्टेडियम रुकने वाले थे, लेकिन अब उस स्थान को बदलने की कवायद चल रही है।

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खेत बचाओ अभियान अंतर्गत भोजपुर जिला के दो गांव में किसानों को दिया प्रशिक्षण भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना द्वारा संचालित “खेत बचाओ अभियान” के अंतर्गत भोजपुर जिले के सहार प्रखंड के दो गांवों में किसानों के लिए जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, फसल सुरक्षा तथा मृदा स्वास्थ्य संरक्षण के प्रति जागरूक करना था। अभियान के अंतर्गत पहला कार्यक्रम धनछुआ गांव, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें कुल 30 किसानों ने भाग लिया। प्रतिभागियों में 27 पुरुष एवं 3 महिला किसान शामिल थीं। वहीं दूसरा कार्यक्रम कोनी गांव, चौरी पंचायत, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें 31 किसानों ने सहभागिता की। प्रशिक्षण कार्यक्रम में आईसीएआर-पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना से विशेषज्ञगण डॉ. पंकज कुमार, डॉ. मनोज कुमार त्रिपाठी तथा श्री ए.एस. महापात्रा मौजूद थे। साथ ही, कृषि विज्ञान केंद्र, आरा के विषय वस्तु विशेषज्ञ डॉ. विकास सिंह मौजूद थे। विशेषज्ञों ने किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का प्रयोग करने से फसलों को आवश्यक पोषक तत्व उचित मात्रा में प्राप्त होते हैं, जिससे उत्पादन लागत कम होती है तथा फसल की उत्पादकता में वृद्धि होती है। उन्होंने रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध उपयोग से बचने तथा एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन अपनाने पर बल दिया। कार्यक्रम के दौरान किसानों को हरित खाद के महत्व से भी अवगत कराया गया। वैज्ञानिकों ने बताया कि धैंचा एवं सनई जैसी फसलों का उपयोग हरित खाद के रूप में करने से मिट्टी में जैविक कार्बन एवं नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ती है, मृदा की संरचना में सुधार होता है तथा भूमि की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहती है। उन्होंने किसानों को खरीफ मौसम में धैंचा एवं सनई की खेती कर उन्हें खेत में पलटने की तकनीक एवं उसके लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम के दौरान किसानों की समस्याओं एवं जिज्ञासाओं का समाधान भी किया गया। किसानों ने प्रशिक्षण कार्यक्रम को अति उपयोगी बता, ऐसी जागरुकता गतिविधियों के निरंतर आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया