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पटना : कभी अपनी मनोहर चाल से ब्रह्ममुहूर्त का संदेश देने वाली प्रिय स्वर्णिम चिड़िया गौरैया को अब संरक्षण की आवश्यकता है। गौरैया की संख्या निरंतर घट रही है, फिर भी हमारा समाज उदासीन है। विश्व गौरैया दिवस पहली बार 20 मार्च 2010 को मनाया गया, जो गौरैया के लिए सुरक्षित और स्वागत योग्य वातावरण बनाने की हमारी उत्तरदायित्व की याद दिलाता है। यदि आप चहचहाहट सुनना चाहते हैं, तो अपने भीतर और समाज में इन लुप्तप्राय प्रजातियों के संरक्षण के लिए जागृति बढ़ाएं।
यह दिवस भारत की ‘नेचर फॉर एवर सोसाइटी’ के इको-सिस्टम एक्शन फाउंडेशन के सहयोग से 2010 में प्रारम्भ किया गया।
20 मार्च 2026 को लाइफ 360 डिग्री (रजि.) सामाजिक संस्था ने विश्व गौरैया दिवस पटना के राजकीय कन्या मध्य विद्यालय अदालत गंज एवं बूतरु मंडली न्यू पाटलिपुत्र कालोनी में मनाया गया।
कन्या मध्य विद्यालय में नृपेंद्र कुमार ने विद्यार्थियों को गौरैया के महत्व की जानकारी दी। उन्होंने बताया गौरैया हमारे लिए लाभदायक पक्षी रहा है। बुतरु मंडली के बच्चों ने कबाड़ से घोंसला बनाया, कहानी, कविता, पाठ भी किया। गौरैया संरक्षण पर लघु क्विज प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया। जिसमें विजेता बच्चों को पुरस्कृत किया गया।
संस्था संस्थापक अजीत झा ने बच्चों को गौरैया के संरक्षण उपाए एवं उसे कैसे अपने घर बुलाने की विधि संग मानव जीवन में गौरैया कितना महत्व रखती है, इस पर भी प्रकाश डाला। अंत में विद्यार्थियों ने शपथ लिया कि हम हम गौरैया को बचाएंगे।
उपर्युक्त कार्यक्रम को सफल बनाने में के श्रेयसी, शताक्षी, राजा, नन्ही, आयाम, दर्श, आर्यन, शगुन, अंजलि, रवि एवं सुनील की भूमिका महत्वपूर्ण रही।
