Wed. Jun 24th, 2026

बिहार के वैशाली में बड़ी दुर्घटना, करंट लगने से 9 कांवरियों की अकाल मृत्यु 6 अन्य घायल

एस एन श्याम/ अनमोल कुमार की रपट

पटना: बिहार की राजधानी पटना का पड़ोसी जिला वैशाली के हाजीपुर में देर रात हुई दुर्घटना में 9 कांवरियों की अकाल मृत्यु हो गई। उसी में 6 अन्य कांवरियां घायल बताए गए है। जिन्हें चिकित्सार्थ हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है। उनमें एक की स्थिति काफी चिंताजनक बताई जा रही है ।
प्राप्त जानकारी के अनुसार वैशाली के कुछ शिव भक्त कांवरिया पहलेजा से गंगाजल लेकर सोनपुर स्थित बाबा हरिहर नाथ पर जलार्पण करने जाने के क्रम में हाई वॉल्टेज तार की चपेट में आए और उपर्युक्त दुर्रघटना हो गई। बताया गया है कि कांवरियों के पास बैंड बाजा और डीजे रहा, हाजीपुर के सुल्तानपुर गांव में कांवरियों का डीजे वाला हाई वोल्टेज तार की चपेट में आ गया। जिससे घटनास्थल पर तत्क्षण नौ लोगों ने दम तोड़ दिया। इस घटना के विरोध में ग्रामीणों ने हंगामा भी किया। मृतकों में कांवरियों में रवि कुमार, राजा कुमार, नवीन कुमार, अमरेश कुमार, अशोक कुमार, चंदन कुमार, कालू कुमार, आशीष कुमार बताए गए हैं। वैशाली के एसडीओ और अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी देर रात ही घटना स्थल पर पहुंचकर स्थिति का अवलोकन किया । उपर्युक्त दुर्रघटना रविवार की रात 12:00 बजे से 3:00 बजे के बीच की बताई गई है। मृतक के परिजनों पर दुःख का पहाड़ टूट पड़ा है। परिजनों विशेषकर महिलाओं की चीत्कार से करुण वातावरण बन गया है।

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By Awadhesh Sharma

न्यूज एन व्यूज फॉर नेशन

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खेत बचाओ अभियान अंतर्गत भोजपुर जिला के दो गांव में किसानों को दिया प्रशिक्षण भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना द्वारा संचालित “खेत बचाओ अभियान” के अंतर्गत भोजपुर जिले के सहार प्रखंड के दो गांवों में किसानों के लिए जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, फसल सुरक्षा तथा मृदा स्वास्थ्य संरक्षण के प्रति जागरूक करना था। अभियान के अंतर्गत पहला कार्यक्रम धनछुआ गांव, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें कुल 30 किसानों ने भाग लिया। प्रतिभागियों में 27 पुरुष एवं 3 महिला किसान शामिल थीं। वहीं दूसरा कार्यक्रम कोनी गांव, चौरी पंचायत, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें 31 किसानों ने सहभागिता की। प्रशिक्षण कार्यक्रम में आईसीएआर-पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना से विशेषज्ञगण डॉ. पंकज कुमार, डॉ. मनोज कुमार त्रिपाठी तथा श्री ए.एस. महापात्रा मौजूद थे। साथ ही, कृषि विज्ञान केंद्र, आरा के विषय वस्तु विशेषज्ञ डॉ. विकास सिंह मौजूद थे। विशेषज्ञों ने किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का प्रयोग करने से फसलों को आवश्यक पोषक तत्व उचित मात्रा में प्राप्त होते हैं, जिससे उत्पादन लागत कम होती है तथा फसल की उत्पादकता में वृद्धि होती है। उन्होंने रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध उपयोग से बचने तथा एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन अपनाने पर बल दिया। कार्यक्रम के दौरान किसानों को हरित खाद के महत्व से भी अवगत कराया गया। वैज्ञानिकों ने बताया कि धैंचा एवं सनई जैसी फसलों का उपयोग हरित खाद के रूप में करने से मिट्टी में जैविक कार्बन एवं नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ती है, मृदा की संरचना में सुधार होता है तथा भूमि की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहती है। उन्होंने किसानों को खरीफ मौसम में धैंचा एवं सनई की खेती कर उन्हें खेत में पलटने की तकनीक एवं उसके लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम के दौरान किसानों की समस्याओं एवं जिज्ञासाओं का समाधान भी किया गया। किसानों ने प्रशिक्षण कार्यक्रम को अति उपयोगी बता, ऐसी जागरुकता गतिविधियों के निरंतर आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया