Mon. Apr 22nd, 2024

मानव जब तक अपने मन से स्थिति ऐसे बनाए रखता है। कि जिसमे संदेह भरे हुए हो भय भरा हुआ हो निराशा पड़ी हो तब तक वह अवसर का लाभ नही उठाता सुख शान्ति तथा अपने अधिकार को प्राप्त करने के कोशिश नहीं करता। इसके विपरीत जब उसके मन दृढ़ आत्मविव्श्रास का भाव उदित होता हैं तो वह अथक परिश्रम करता है। परिणाम यह होता हैं कि मनइच्छि वस्तुओ का स्वामी बन जाता है। अज्ञानता संदेह और भय ही मनुष्य को कंगाल बनाए रखते हैं। चक्की में जितना अनाज डालोगे उतना ही आटा निकलेगा। विशाल भावनाओं से ओतप्रोत रहिए।

आत्मा को दूरंदेशी बनाइए। यदि विचार श्रेष्ठ हैं तो अवश्य सुखी हो जाएंगे यदि विचार अभी भी द्ररिद्रता के है तो वर्तमान दशा में कोई भी सुधार नही कर सकता। साधारण बनने से इनकार कीजिए मध्यम बनने का विरोध कीजिए। जैसे कि अपने छोटे छोटे काम को खूसी से कीजिए कि वह गौरवपूर्ण और महान बन जाए।

 

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