Wed. Jun 24th, 2026

बैरिया। विभिन्न मांगों के समर्थन में आशा कार्यकर्ताओं ने पीएचसी बैरिया पर धरना प्रदर्शन कर स्वास्थ्य सम्बंधी काम काज को ठप कर दिया।  अपनी 9 सूत्री मांग को लेकर 12 जुलाई 23 से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर है। धरना प्रदर्शन को संबोधित करते हुए भाकपा माले नेता सुनील राव ने कहा कि राज्य के ग्रामीण स्वास्थ्य सेवा की बुनियाद के रूप में आशा कार्यकर्ता व आशा फेसिलिटेटर सेवा देती आ रही है। इनकी सेवाओं का प्रतिफल है कि सरकारी संस्थागत प्रसव बेहतर व सुरक्षित हो रहा है । साथ ही साथ जन्म-मृत्यु की दर घटी है । उसके बावजूद सरकार के द्वारा उन्हें कोई खास सुविधा नहीं दी जा रही है। उन्होने कहा कि सरकार इन महिलाओं के साथ भेदभाव कर रही है । कोरोना जैसे महामारी मे भी इन आशा कार्यकर्ताओ ने धरातल पर लोगो को बचाने मे अपनी जान भी जोखिम मे डालकर अपनी सेवा दी है। परंतु सरकार उन आशाओ की मांग पूरी नही करना नहीं चाहती है। सरकार की तानाशाही है । मुखिया नवीन कुमार व माले नेता सुरेन्द्र चौधरी ने कहा कि नौ सूत्री मांगों मे अन्य राज्यों की तरह नियत मानदेय देने की मांग आशा कर रही है । वही मानदेय 10 हज़ार करने, पोर्टल से भुगतान शुरू होने से पूर्व का सभी बकाया राशि का भुगतान करने, प्रोत्साहन-मासिक पारितोषिक राशि का अद्यतन भुगतान आदि मांगे शामिल है।जिसको लेकर आशा 12 जुलाई से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चली गई है ।इस मौके पर बैठक में मुख्य रूप से सहजादी खातुन,गायत्री देवी,प्रेमा देवी,किरण देवी, समीदा खातुन, हसनतारा खातुन, संजु देवी, समीदा खातुन, सरोज कुवर, माला देवी सही दर्जनो मौजुद रही।

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By Awadhesh Sharma

न्यूज एन व्यूज फॉर नेशन

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खेत बचाओ अभियान अंतर्गत भोजपुर जिला के दो गांव में किसानों को दिया प्रशिक्षण भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना द्वारा संचालित “खेत बचाओ अभियान” के अंतर्गत भोजपुर जिले के सहार प्रखंड के दो गांवों में किसानों के लिए जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, फसल सुरक्षा तथा मृदा स्वास्थ्य संरक्षण के प्रति जागरूक करना था। अभियान के अंतर्गत पहला कार्यक्रम धनछुआ गांव, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें कुल 30 किसानों ने भाग लिया। प्रतिभागियों में 27 पुरुष एवं 3 महिला किसान शामिल थीं। वहीं दूसरा कार्यक्रम कोनी गांव, चौरी पंचायत, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें 31 किसानों ने सहभागिता की। प्रशिक्षण कार्यक्रम में आईसीएआर-पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना से विशेषज्ञगण डॉ. पंकज कुमार, डॉ. मनोज कुमार त्रिपाठी तथा श्री ए.एस. महापात्रा मौजूद थे। साथ ही, कृषि विज्ञान केंद्र, आरा के विषय वस्तु विशेषज्ञ डॉ. विकास सिंह मौजूद थे। विशेषज्ञों ने किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का प्रयोग करने से फसलों को आवश्यक पोषक तत्व उचित मात्रा में प्राप्त होते हैं, जिससे उत्पादन लागत कम होती है तथा फसल की उत्पादकता में वृद्धि होती है। उन्होंने रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध उपयोग से बचने तथा एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन अपनाने पर बल दिया। कार्यक्रम के दौरान किसानों को हरित खाद के महत्व से भी अवगत कराया गया। वैज्ञानिकों ने बताया कि धैंचा एवं सनई जैसी फसलों का उपयोग हरित खाद के रूप में करने से मिट्टी में जैविक कार्बन एवं नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ती है, मृदा की संरचना में सुधार होता है तथा भूमि की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहती है। उन्होंने किसानों को खरीफ मौसम में धैंचा एवं सनई की खेती कर उन्हें खेत में पलटने की तकनीक एवं उसके लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम के दौरान किसानों की समस्याओं एवं जिज्ञासाओं का समाधान भी किया गया। किसानों ने प्रशिक्षण कार्यक्रम को अति उपयोगी बता, ऐसी जागरुकता गतिविधियों के निरंतर आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया