Wed. Jun 24th, 2026

 

नगर पंचायत के अलमीरा में बंद चेक से 48,700 रुपए की निकासी

बेतिया : साइबर ठगों ने अब सरकारी खजाने में सेंध लगाना प्रारम्भ कर दिया है। जालसाजों ने काफी शातिराना अंदाज में चनपटिया नगर पंचायत कार्यालय के खाता से गत 01 जुलाई 2023 को क्लोन चेक के माध्यम से चेन्नई में 48,700 हजार रुपये उड़ा लिया हैं। एसबीआई के चनपटिया मेन ब्रांच में नपं का दो सरकारी खाता है। हैरत की बात तो ये है कि जिस चेक संख्या से ठगों ने निकासी की है, वह चेक नगर पंचायत कार्यालय में अभी है। इसका खुलासा तब हुआ जब नपं के कर्मी ने बैंक विवरणी से निर्गत चेक का मिलान किया। उसने बैंक विवरणी में पाया कि 01 जुलाई 2023 को चेक संख्या 853349 से चेन्नई में 48,700 रुपए की निकासी कर ली गई है। कर्मी ने देखा तो उपर्युक्त चेक संख्या कार्यालय के आलमीरा में सुरक्षित रखा है। इस बाबत नगर पंचायत के कार्यपालक पदाधिकारी लक्ष्मण प्रसाद ने एसबीआई बैंक को पत्र भेज निर्गत सभी चेकबुक के सीरीज पर तत्काल रोक लगवा दिया है। इस मामले की जांच करने में बैंक के पदाधिकारी जुट गये हैं।

Spread the love

By Awadhesh Sharma

न्यूज एन व्यूज फॉर नेशन

Leave a Reply

You missed

खेत बचाओ अभियान अंतर्गत भोजपुर जिला के दो गांव में किसानों को दिया प्रशिक्षण भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना द्वारा संचालित “खेत बचाओ अभियान” के अंतर्गत भोजपुर जिले के सहार प्रखंड के दो गांवों में किसानों के लिए जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, फसल सुरक्षा तथा मृदा स्वास्थ्य संरक्षण के प्रति जागरूक करना था। अभियान के अंतर्गत पहला कार्यक्रम धनछुआ गांव, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें कुल 30 किसानों ने भाग लिया। प्रतिभागियों में 27 पुरुष एवं 3 महिला किसान शामिल थीं। वहीं दूसरा कार्यक्रम कोनी गांव, चौरी पंचायत, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें 31 किसानों ने सहभागिता की। प्रशिक्षण कार्यक्रम में आईसीएआर-पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना से विशेषज्ञगण डॉ. पंकज कुमार, डॉ. मनोज कुमार त्रिपाठी तथा श्री ए.एस. महापात्रा मौजूद थे। साथ ही, कृषि विज्ञान केंद्र, आरा के विषय वस्तु विशेषज्ञ डॉ. विकास सिंह मौजूद थे। विशेषज्ञों ने किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का प्रयोग करने से फसलों को आवश्यक पोषक तत्व उचित मात्रा में प्राप्त होते हैं, जिससे उत्पादन लागत कम होती है तथा फसल की उत्पादकता में वृद्धि होती है। उन्होंने रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध उपयोग से बचने तथा एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन अपनाने पर बल दिया। कार्यक्रम के दौरान किसानों को हरित खाद के महत्व से भी अवगत कराया गया। वैज्ञानिकों ने बताया कि धैंचा एवं सनई जैसी फसलों का उपयोग हरित खाद के रूप में करने से मिट्टी में जैविक कार्बन एवं नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ती है, मृदा की संरचना में सुधार होता है तथा भूमि की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहती है। उन्होंने किसानों को खरीफ मौसम में धैंचा एवं सनई की खेती कर उन्हें खेत में पलटने की तकनीक एवं उसके लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम के दौरान किसानों की समस्याओं एवं जिज्ञासाओं का समाधान भी किया गया। किसानों ने प्रशिक्षण कार्यक्रम को अति उपयोगी बता, ऐसी जागरुकता गतिविधियों के निरंतर आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया