Wed. Jun 24th, 2026

 

युवक की हत्या हत्या या मौत बनी पहेली

बेतिया : पश्चिम चम्पारण जिला के बेतिया पुलिस अंतर्गत चनपटिया थाना क्षेत्र के चनपटिया के बनकट गांव के समीप बैरिया के बगही तमौलिया गांव निवासी राजू महतो (22वर्ष) की हत्या कर रेलवे ट्रैक पर शव फेंकने के मामले में उसके पिता मिश्री महतो के बयान पर चनपटिया थाना में प्राथमिकी दर्ज की गई है। जिसमें मृतक के बगल के वार्ड सदस्य कृष्णा महतो को आरोपी बनाया गया है। जिसमें मृतक के पिता ने आरोप लगाया है कि गुरुवार को पड़ोसी कृष्णा महतो ने उसके पुत्र को किसी काम से बेतिया ले गया। फिर उसे कहीं छोड़कर रात में घर वापस आ गया।उन्होंने आरोप लगाया है कि आरोपी कृष्णा ने अन्य अज्ञात के साथ मिलकर उनके बेटे की हत्या की है। थानाध्यक्ष मनीष कुमार ने बताया कि पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर अनुसंधान प्रारम्भ कर दिया है। अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर सबकी निगाहें टिकी हुई है। हालाकि पुलिस आरोपी को गिरफ्तार करने की दिशा में कार्रवाई कर रही है। उल्लेखनीय है कि शुक्रवार की सुबह बैरिया के बगही तमौलिया गांव निवासी राजू महतो का शव को चनपटिया बनकट गांव के समीप रेलवे ट्रैक पर पाया गया। पाटलिपुत्र जाने वाली इंटरसिटी एक्सप्रेस के चालक ने रेलवे ट्रैक पर शव देख स्टेशन मास्टर को इसकी सूचना दी।पुलिस ने परिजनों को घटना की जानकारी दी और शव को पोस्टमार्टम के लिए जीएमसीएच बेतिया भेज दिया। प्रश्न यह उठता है कि कृष्णा ने राजू को रास्ते में छोड़कर घर क्यों गया? वह अपने मौसेरे भाई के ससुराल चनपटिया के टिकुलिया धाँगड़ टोली कैसे पहुंचा? ऐसे कई सवाल पुलिस के लिए पहेली बनी हुई है। इधर सूत्रों के अनुसार आरोपी कृष्णा और मृतक राजू के परिवार वालों के बीच पूर्व से जमीनी विवाद भी है। कयास लगाया जा रहा है कि इसी विवाद के कारण तो राजू की हत्या नहीं कर दी गई।

Spread the love

By Awadhesh Sharma

न्यूज एन व्यूज फॉर नेशन

Leave a Reply

You missed

खेत बचाओ अभियान अंतर्गत भोजपुर जिला के दो गांव में किसानों को दिया प्रशिक्षण भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना द्वारा संचालित “खेत बचाओ अभियान” के अंतर्गत भोजपुर जिले के सहार प्रखंड के दो गांवों में किसानों के लिए जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, फसल सुरक्षा तथा मृदा स्वास्थ्य संरक्षण के प्रति जागरूक करना था। अभियान के अंतर्गत पहला कार्यक्रम धनछुआ गांव, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें कुल 30 किसानों ने भाग लिया। प्रतिभागियों में 27 पुरुष एवं 3 महिला किसान शामिल थीं। वहीं दूसरा कार्यक्रम कोनी गांव, चौरी पंचायत, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें 31 किसानों ने सहभागिता की। प्रशिक्षण कार्यक्रम में आईसीएआर-पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना से विशेषज्ञगण डॉ. पंकज कुमार, डॉ. मनोज कुमार त्रिपाठी तथा श्री ए.एस. महापात्रा मौजूद थे। साथ ही, कृषि विज्ञान केंद्र, आरा के विषय वस्तु विशेषज्ञ डॉ. विकास सिंह मौजूद थे। विशेषज्ञों ने किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का प्रयोग करने से फसलों को आवश्यक पोषक तत्व उचित मात्रा में प्राप्त होते हैं, जिससे उत्पादन लागत कम होती है तथा फसल की उत्पादकता में वृद्धि होती है। उन्होंने रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध उपयोग से बचने तथा एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन अपनाने पर बल दिया। कार्यक्रम के दौरान किसानों को हरित खाद के महत्व से भी अवगत कराया गया। वैज्ञानिकों ने बताया कि धैंचा एवं सनई जैसी फसलों का उपयोग हरित खाद के रूप में करने से मिट्टी में जैविक कार्बन एवं नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ती है, मृदा की संरचना में सुधार होता है तथा भूमि की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहती है। उन्होंने किसानों को खरीफ मौसम में धैंचा एवं सनई की खेती कर उन्हें खेत में पलटने की तकनीक एवं उसके लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम के दौरान किसानों की समस्याओं एवं जिज्ञासाओं का समाधान भी किया गया। किसानों ने प्रशिक्षण कार्यक्रम को अति उपयोगी बता, ऐसी जागरुकता गतिविधियों के निरंतर आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया