Wed. Jun 24th, 2026

नगर निगम दुर्ग सीमा के अंतर्गत सुआ चौक जेल तिराहा के पास सड़क किनारे अवैध कब्जा कर पौधा व गमला बेचने वालो के कारण लोगों को आवाजाही में दिक्कत हो रहा था। इसे देखते हुए आयुक्त लोकेश चंद्राकर के निर्देश पर अतिक्रमण प्रभारी ने सड़क घेरकर पौधा बेचने वालो को हटने का अंतिम चेतावनी दी थी। लेकिन समझाइश का असर नहीं हुआ तो निगम टीम कार्रवाई करते हुए गौरवपथ पर बिखरे हुए पौधे सहित अन्य सामाग्री को हटवाकर जब्त किया। अफसरों ने कहा कि चौक चौराहों पर सड़क घेरकर व्यवसाय न करें।

आगे ओवरब्रिज के सामने खाली जगह पर गमले पौधे समेंटकर वहां दुकान लगाएं आयुक्त नें अफसरो को इसकी माँनीटरिंग भी कहा। इसके अलावा यातायात व्यवस्था को बनाए रखने महाराजा चैक उतई स्टैंड चौक  के अलावा सड़क किनारे चौक चौराहो सें ठेले खोमचे को व्यवस्थि करने कार्रवाई के निर्देश दिए गए। अफसरों में शिव शर्मा दुर्गेश गुप्ता मनोहर गोस्वामी ईश्वर शर्मा सहित अन्य शामिल रहे है।

Spread the love

Leave a Reply

You missed

खेत बचाओ अभियान अंतर्गत भोजपुर जिला के दो गांव में किसानों को दिया प्रशिक्षण भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना द्वारा संचालित “खेत बचाओ अभियान” के अंतर्गत भोजपुर जिले के सहार प्रखंड के दो गांवों में किसानों के लिए जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, फसल सुरक्षा तथा मृदा स्वास्थ्य संरक्षण के प्रति जागरूक करना था। अभियान के अंतर्गत पहला कार्यक्रम धनछुआ गांव, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें कुल 30 किसानों ने भाग लिया। प्रतिभागियों में 27 पुरुष एवं 3 महिला किसान शामिल थीं। वहीं दूसरा कार्यक्रम कोनी गांव, चौरी पंचायत, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें 31 किसानों ने सहभागिता की। प्रशिक्षण कार्यक्रम में आईसीएआर-पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना से विशेषज्ञगण डॉ. पंकज कुमार, डॉ. मनोज कुमार त्रिपाठी तथा श्री ए.एस. महापात्रा मौजूद थे। साथ ही, कृषि विज्ञान केंद्र, आरा के विषय वस्तु विशेषज्ञ डॉ. विकास सिंह मौजूद थे। विशेषज्ञों ने किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का प्रयोग करने से फसलों को आवश्यक पोषक तत्व उचित मात्रा में प्राप्त होते हैं, जिससे उत्पादन लागत कम होती है तथा फसल की उत्पादकता में वृद्धि होती है। उन्होंने रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध उपयोग से बचने तथा एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन अपनाने पर बल दिया। कार्यक्रम के दौरान किसानों को हरित खाद के महत्व से भी अवगत कराया गया। वैज्ञानिकों ने बताया कि धैंचा एवं सनई जैसी फसलों का उपयोग हरित खाद के रूप में करने से मिट्टी में जैविक कार्बन एवं नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ती है, मृदा की संरचना में सुधार होता है तथा भूमि की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहती है। उन्होंने किसानों को खरीफ मौसम में धैंचा एवं सनई की खेती कर उन्हें खेत में पलटने की तकनीक एवं उसके लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम के दौरान किसानों की समस्याओं एवं जिज्ञासाओं का समाधान भी किया गया। किसानों ने प्रशिक्षण कार्यक्रम को अति उपयोगी बता, ऐसी जागरुकता गतिविधियों के निरंतर आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया