Wed. Jun 24th, 2026

जिला प्रशासन की गुणवत्ता मस्त, बरसात हुई नहीं कि नव निर्मित पुलिया हो गई छतिग्रस्त

अधीक्षण अभियंता ने कहा दोषी बख्शा नहीं जाएगा

बेतिया : बड़ी घटना का दावत दे रही है, ह्यूमन पाइप पुलिया।मामला अवर प्रमंडल बेतिया का बताया गया है, किसी बड़ी घटना की बाट जोह रहा है विभाग। कार्य करने की समय अवधि भी समाप्त नहीं हुआ कि ध्वस्त होने लगा नव निर्मित ह्यूमन पाइप पुलिया। हमारे सूत्र बताते हैं कि किसी बड़ी घटना का दावत दे रहा है एलओ 30 रेलवे गुमटी से मंगुराहा बारी टोला जाने वाला हृमन पाइप पुलिया, जी….हां!! कहा जाता है कि सरकार आमजन की आवागमन की सुविधा के लिए एवं जल निकासी की सुविधा को दृष्टिगत सड़कों में ह्यूमन पाइप पुलिया का निर्माण करा रही है। जिससे बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की सड़को को बाढ़ में बाढ़ का पानी क्षतिग्रस्त नहीं कर सके, लेकिन अभी बाढ़ का पानी कौन कहे, बरसात ही नहीं हुई अलबत्ता जिला प्रशासन की गुणवत्ता पूर्ण निर्माणकार्य की पोल खुल गई। ह्यूम पाइप पुलिया बरसात पूर्व क्षतिग्रस्त हो गई जो किसी बड़ी घटना का आमंत्रण दे रहा है। जानकर बताते हैं कि ह्यूम पाइप पुलिया निर्माण के समय उसमें कॉम्पेक्शन मजबूती के साथ किया जाता है। जिससे पथ बरसात से क्षतिग्रस्त नहीं हो सके। लेकिन अभी बरसात हुआ ही नहीं लेकिन यहां तो पुलिया क्षतिग्रस्त होने लगा इसी से अनुमान लगाया जा सकता है कि इस पथ के ह्यूम पाइप पुलिया की बरसात में क्या स्थिति रहेगी। इसका मालिक तो भगवान ही है। बताया जाता है कि प्रमंडल के अवर प्रमंडल बेतिया ने सरकार की महत्वकांक्षी योजना मुख्यमंत्री पथ अनुरक्षण कार्यक्रम के अंतर्गत एलओ 30 रेलवे गुमटी से मंगुरहा बारी टोला, पथ का निर्माण 2 सितंबर 2022 से लेकर आगामी 1 जून 23 तक पथ का कार्य पूर्ण कर देना है। कांट्रेक्टर ने समय सीमा से पहले ही काम को पूर्ण कर दिया, जिस पथ की लंबाई 16 50 किमी जिसकी प्रकलित राशि 1,18,47,564 लाख रूपये है। जिसका रख रखाव 5 वर्ष तक के लिए 11 लाख 53 हजार ₹ 336 है कि इस समय अवधि में पथ अगर क्षतिग्रस्त होता है तो उसकी रिपेयरिंग किया जाएगा। जिसका कार्यकारी एजेंसी कार्यपालक अभियंता ग्रामीण कार्य विभाग है। इस रोड को बनने के दौरान देखने के लिए कनीय अभियंता, सहायक अभियंता, कार्यपालक अभियंता ,अधीक्षण अभियंता उसके अलावा कंस्ट्रक्शन कंपनी के अभियंता के समेत एसक्यूएम, एनक्यूएम समेत विभाग के वरीय पदाधिकारी निरीक्षण करते हैं, फिर भी काम कितना उच्च गुणवत्तापूर्ण हो पाता है, इसका सहज अंदाजा लगाया जा सकता है, आखिर इसके पीछे कौन है… ऐसी एजेंसी या काम कर रही है। जिसे इतना जांच करने के बाद भी काम गुणवत्तापूर्ण नहीं हो पाता है। इस संदर्भ में सुनील कुमार कनीय अभियंता, मामले की जांच कर शीघ्र ही मेंटेनेंस कराया जाएगा। अगर इस संदर्भ में कांटेक्ट कार्य नहीं कर रहे हैं तो उनको भी कार्रवाई तो विभाग को लिखा जाएगा। सुनील कुमार कनीय अभियंता ने बताया कि संवेदक को निर्देशित किया गया है अविलंब काम को सुधार करें अन्यथा कार्रवाई के लिए तैयार रहें।रंजीत कुमार, कार्यपालक अभियंता, ने बताया कि मामले की जांच कर कार्रवाई की जाएगी। उपर्युक्त संदर्भ में अनील कुमार, अधीक्षण अभियंता ने बताया कि मामले की जांच कराकर शीघ्र ही कार्रवाई की जाएगी दोषी जो होंगे उन्हें बख्शा नहीं जाएगा।

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By Awadhesh Sharma

न्यूज एन व्यूज फॉर नेशन

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खेत बचाओ अभियान अंतर्गत भोजपुर जिला के दो गांव में किसानों को दिया प्रशिक्षण भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना द्वारा संचालित “खेत बचाओ अभियान” के अंतर्गत भोजपुर जिले के सहार प्रखंड के दो गांवों में किसानों के लिए जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, फसल सुरक्षा तथा मृदा स्वास्थ्य संरक्षण के प्रति जागरूक करना था। अभियान के अंतर्गत पहला कार्यक्रम धनछुआ गांव, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें कुल 30 किसानों ने भाग लिया। प्रतिभागियों में 27 पुरुष एवं 3 महिला किसान शामिल थीं। वहीं दूसरा कार्यक्रम कोनी गांव, चौरी पंचायत, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें 31 किसानों ने सहभागिता की। प्रशिक्षण कार्यक्रम में आईसीएआर-पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना से विशेषज्ञगण डॉ. पंकज कुमार, डॉ. मनोज कुमार त्रिपाठी तथा श्री ए.एस. महापात्रा मौजूद थे। साथ ही, कृषि विज्ञान केंद्र, आरा के विषय वस्तु विशेषज्ञ डॉ. विकास सिंह मौजूद थे। विशेषज्ञों ने किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का प्रयोग करने से फसलों को आवश्यक पोषक तत्व उचित मात्रा में प्राप्त होते हैं, जिससे उत्पादन लागत कम होती है तथा फसल की उत्पादकता में वृद्धि होती है। उन्होंने रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध उपयोग से बचने तथा एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन अपनाने पर बल दिया। कार्यक्रम के दौरान किसानों को हरित खाद के महत्व से भी अवगत कराया गया। वैज्ञानिकों ने बताया कि धैंचा एवं सनई जैसी फसलों का उपयोग हरित खाद के रूप में करने से मिट्टी में जैविक कार्बन एवं नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ती है, मृदा की संरचना में सुधार होता है तथा भूमि की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहती है। उन्होंने किसानों को खरीफ मौसम में धैंचा एवं सनई की खेती कर उन्हें खेत में पलटने की तकनीक एवं उसके लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम के दौरान किसानों की समस्याओं एवं जिज्ञासाओं का समाधान भी किया गया। किसानों ने प्रशिक्षण कार्यक्रम को अति उपयोगी बता, ऐसी जागरुकता गतिविधियों के निरंतर आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया