Tue. Jun 23rd, 2026

दुर्ग जिला  के  मौसम  के चलते बीते  तीन दिन से धूप, बदली और वर्षा  हो रहा है। शनिवार को   शाम के समय  अचानक से मौसम ने परिवर्तन ली और यहां तेज हवा के साथ-साथ वर्षा भी हुई। यह बारिश रात भर रुक-रुक कर होती रही। इससे भिलाई के जयंति स्टेडियम में बना शिव महापुराण कथा स्थान मैदान पर   पानी से भरा हुआ  गया है । यहां रुके हुए लाखों भक्त पानी से बचने के लिए इधर उधर भागते रहे।

भक्तों में शिव महापुराण सुनने  का  देखने का ऐसा जुनून  छया हुआ  है कि देर  रात भर हुई वर्षा भी उन्हें पंडाल से नहीं हटा सकी। लाखों भक्त रातभर गाना बजाना करते रहे और सबेरे  होते ही गीला  भूमी व दरी में कथा  सुनने के लिए जगह बना ली। बलौदा बाजार से आए भक्त राकेश मिश्रा और प्रमिला साहू ने बताया कि रात में थोड़ी परेशानी हुई, लेकिन शिव भक्ति के भजन में लीन होकर सभी भक्तों ने इस समस्या को झेल लिया। उन्होंने बताया कि रात में इतनी ठंडी हवा चल रही थी कि गर्मी के मौसम में ठंड लगने लगी है । तेज हवा चल रही थी, इससे पंडालों के पर्दे फट गए और उखड़ गए। जिन भक्तों के रिश्तेदार भिलाई में थे वो तो वहां चले गए, लेकिन जिनका कोई नहीं उनका शिव सहारा बना। सभी भक्त मुख्य पंडाल के नीचे आ गए और पूरी रात भजन कीर्तन के साथ काटी। भिलाई में मौसम का हाल ये है कि रविवार दोपहर तक यहां बदली छाई रहीगी । बादल गरज रहे हैं। साथ ही हल्की बूंदा बांदी भी हो रहा  है।

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खेत बचाओ अभियान अंतर्गत भोजपुर जिला के दो गांव में किसानों को दिया प्रशिक्षण भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना द्वारा संचालित “खेत बचाओ अभियान” के अंतर्गत भोजपुर जिले के सहार प्रखंड के दो गांवों में किसानों के लिए जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, फसल सुरक्षा तथा मृदा स्वास्थ्य संरक्षण के प्रति जागरूक करना था। अभियान के अंतर्गत पहला कार्यक्रम धनछुआ गांव, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें कुल 30 किसानों ने भाग लिया। प्रतिभागियों में 27 पुरुष एवं 3 महिला किसान शामिल थीं। वहीं दूसरा कार्यक्रम कोनी गांव, चौरी पंचायत, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें 31 किसानों ने सहभागिता की। प्रशिक्षण कार्यक्रम में आईसीएआर-पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना से विशेषज्ञगण डॉ. पंकज कुमार, डॉ. मनोज कुमार त्रिपाठी तथा श्री ए.एस. महापात्रा मौजूद थे। साथ ही, कृषि विज्ञान केंद्र, आरा के विषय वस्तु विशेषज्ञ डॉ. विकास सिंह मौजूद थे। विशेषज्ञों ने किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का प्रयोग करने से फसलों को आवश्यक पोषक तत्व उचित मात्रा में प्राप्त होते हैं, जिससे उत्पादन लागत कम होती है तथा फसल की उत्पादकता में वृद्धि होती है। उन्होंने रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध उपयोग से बचने तथा एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन अपनाने पर बल दिया। कार्यक्रम के दौरान किसानों को हरित खाद के महत्व से भी अवगत कराया गया। वैज्ञानिकों ने बताया कि धैंचा एवं सनई जैसी फसलों का उपयोग हरित खाद के रूप में करने से मिट्टी में जैविक कार्बन एवं नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ती है, मृदा की संरचना में सुधार होता है तथा भूमि की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहती है। उन्होंने किसानों को खरीफ मौसम में धैंचा एवं सनई की खेती कर उन्हें खेत में पलटने की तकनीक एवं उसके लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम के दौरान किसानों की समस्याओं एवं जिज्ञासाओं का समाधान भी किया गया। किसानों ने प्रशिक्षण कार्यक्रम को अति उपयोगी बता, ऐसी जागरुकता गतिविधियों के निरंतर आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया