Mon. Jun 22nd, 2026

बस्ती समुदाय में अब कचरा  एकत्रित के लिए घर-घर तक ई व्हीकल सवारी. पहुंचेगी। यह व्यवस्था मई के अंत तक शुरू होगी। इससे पर्यावरण को सुरक्षित करने में न केवल मदद मिलेगी। साथ ही कचरा  एकत्रित  का काम भी आसान हो जाएगा। बस्ती समुदाय  में प्रतिदिन करीब लगभग  38 से 40 क्षमता  कचरा निकलता है। इस कचरे को एकत्रित कर ट्रेचिंग ग्राउंड तक पहुंचाने के लिए ट्रैक्टर ट्राली की मदद ली जा रही है

लेकिन कई सेक्टर्स में अंदर की सड़कें कम चौड़ी होने की वजह से ट्रैक्टर-ट्राली प्रवेश नहीं कर पा रहे हैं। जिसके कारण उन्हें चौक में खड़ा करने के बाद कचरा  एकत्रित  करने के लिए घर-घर पैदल जाना पड़ रहा है। इस समस्या को ध्यान में रखते हुए बीएसपी प्रबंधन ने अब ई रिक्शा का इस्तेमाल करने का निर्णय लिया है। ताकि बस्ती समुदाय  के हर घर तक यह पहुंच सके। इसके लिए निविदा की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। 21 अप्रैल को बीड भरने की अंतिम तिथि है। इसके बाद कांट्रैक्ट अवार्ड किया जाएगा। प्रबंधन ने मई के अंतिम सप्ताह तक ई रिक्शा से कचरा  एकत्रित का काम शुरू किए जाने की संभावना जता रहा है।

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खेत बचाओ अभियान अंतर्गत भोजपुर जिला के दो गांव में किसानों को दिया प्रशिक्षण भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना द्वारा संचालित “खेत बचाओ अभियान” के अंतर्गत भोजपुर जिले के सहार प्रखंड के दो गांवों में किसानों के लिए जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, फसल सुरक्षा तथा मृदा स्वास्थ्य संरक्षण के प्रति जागरूक करना था। अभियान के अंतर्गत पहला कार्यक्रम धनछुआ गांव, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें कुल 30 किसानों ने भाग लिया। प्रतिभागियों में 27 पुरुष एवं 3 महिला किसान शामिल थीं। वहीं दूसरा कार्यक्रम कोनी गांव, चौरी पंचायत, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें 31 किसानों ने सहभागिता की। प्रशिक्षण कार्यक्रम में आईसीएआर-पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना से विशेषज्ञगण डॉ. पंकज कुमार, डॉ. मनोज कुमार त्रिपाठी तथा श्री ए.एस. महापात्रा मौजूद थे। साथ ही, कृषि विज्ञान केंद्र, आरा के विषय वस्तु विशेषज्ञ डॉ. विकास सिंह मौजूद थे। विशेषज्ञों ने किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का प्रयोग करने से फसलों को आवश्यक पोषक तत्व उचित मात्रा में प्राप्त होते हैं, जिससे उत्पादन लागत कम होती है तथा फसल की उत्पादकता में वृद्धि होती है। उन्होंने रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध उपयोग से बचने तथा एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन अपनाने पर बल दिया। कार्यक्रम के दौरान किसानों को हरित खाद के महत्व से भी अवगत कराया गया। वैज्ञानिकों ने बताया कि धैंचा एवं सनई जैसी फसलों का उपयोग हरित खाद के रूप में करने से मिट्टी में जैविक कार्बन एवं नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ती है, मृदा की संरचना में सुधार होता है तथा भूमि की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहती है। उन्होंने किसानों को खरीफ मौसम में धैंचा एवं सनई की खेती कर उन्हें खेत में पलटने की तकनीक एवं उसके लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम के दौरान किसानों की समस्याओं एवं जिज्ञासाओं का समाधान भी किया गया। किसानों ने प्रशिक्षण कार्यक्रम को अति उपयोगी बता, ऐसी जागरुकता गतिविधियों के निरंतर आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया