Tue. Jun 23rd, 2026

शक्षा का अधिकार के तहत जिला के 515 स्कूलों की 4920 सीटों के लिए 10 अप्रैल तक आँनलाइन आवेदन लिए जाएंगे। इसके लिए अभी सिर्फ दो दिन बचे है। 11 अप्रैल के बाद 11 मई तक नोडल अधिकारी करेंगे दस्तावेजों की जांच की जाएगी 15 से 25 मई तक लाँटरी व सीटों का आबटन होगा। स्कूलों में दाखिला 16 से 20 जून तक होगा दूसरा चरण का पंजीयन 1 सें 15 जुलाई तक होगा। दस्तावेजों की जांच 16 से 25 जुलाई तक लाँटरी एवं आबंटन 27 जुलाई से 2 अगस्त तक और दाखिला 3 से 27 जुलाई से 2 अगस्त और दाखिला 3 से 14 अगस्त तक होगा

होगा इस बार स्कूलो में दर्ज संख्या के आधार पर 25 फीसदी सीटें सुरक्षित रखी गई है। शिक्षा सत्र 2023 से 24 में शिक्षा का अधिकार के तहत जिला के 515 स्कूलो की संख्या 528 थी और सीटों की संख्या 5728। इस बार 808 सीटें कम हो गईं। इस बार दी जाएगी स्कूल के आसपास के बच्चों को प्राथमिकता बालक गैर सरकारी विधालयों के आस पास के परिक्षेत्र में निवास करने वाला होना चाहिए। विधालय शहरी क्षेत्रों में संबंधित स्थनीय निकाय नगर निगम नगर पालिका ग्राम पंचायत से बाहर रहने वाले छात्र उस स्कूल में प्रवेश के पात्र नही होगा इसी आधार पर प्रवेश दिया जाएगा।

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खेत बचाओ अभियान अंतर्गत भोजपुर जिला के दो गांव में किसानों को दिया प्रशिक्षण भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना द्वारा संचालित “खेत बचाओ अभियान” के अंतर्गत भोजपुर जिले के सहार प्रखंड के दो गांवों में किसानों के लिए जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, फसल सुरक्षा तथा मृदा स्वास्थ्य संरक्षण के प्रति जागरूक करना था। अभियान के अंतर्गत पहला कार्यक्रम धनछुआ गांव, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें कुल 30 किसानों ने भाग लिया। प्रतिभागियों में 27 पुरुष एवं 3 महिला किसान शामिल थीं। वहीं दूसरा कार्यक्रम कोनी गांव, चौरी पंचायत, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें 31 किसानों ने सहभागिता की। प्रशिक्षण कार्यक्रम में आईसीएआर-पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना से विशेषज्ञगण डॉ. पंकज कुमार, डॉ. मनोज कुमार त्रिपाठी तथा श्री ए.एस. महापात्रा मौजूद थे। साथ ही, कृषि विज्ञान केंद्र, आरा के विषय वस्तु विशेषज्ञ डॉ. विकास सिंह मौजूद थे। विशेषज्ञों ने किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का प्रयोग करने से फसलों को आवश्यक पोषक तत्व उचित मात्रा में प्राप्त होते हैं, जिससे उत्पादन लागत कम होती है तथा फसल की उत्पादकता में वृद्धि होती है। उन्होंने रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध उपयोग से बचने तथा एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन अपनाने पर बल दिया। कार्यक्रम के दौरान किसानों को हरित खाद के महत्व से भी अवगत कराया गया। वैज्ञानिकों ने बताया कि धैंचा एवं सनई जैसी फसलों का उपयोग हरित खाद के रूप में करने से मिट्टी में जैविक कार्बन एवं नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ती है, मृदा की संरचना में सुधार होता है तथा भूमि की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहती है। उन्होंने किसानों को खरीफ मौसम में धैंचा एवं सनई की खेती कर उन्हें खेत में पलटने की तकनीक एवं उसके लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम के दौरान किसानों की समस्याओं एवं जिज्ञासाओं का समाधान भी किया गया। किसानों ने प्रशिक्षण कार्यक्रम को अति उपयोगी बता, ऐसी जागरुकता गतिविधियों के निरंतर आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया