Tue. Jun 23rd, 2026

निगम के जल कार्य विभाग और अमृत मिशन हर घर में पानी की सुनिश्चित भरना। के अधिकारियों की बुधवार को बैठक हुई। लगभग  घंटे भर से अधिक चली बैठक में शहर में पेयजल के  दिक्कत न हो इस विषय पर बात चित की गई। महापौर धीरज बाकलीवाल ने कहा कि गर्मी आते ही पानी की उसकी माँग अधिक  बढ़ गई है। अब तक अमृत मिशन का काम पूरा नहीं हो पाया है। टेस्टिंग सहित अन्य कार्यों को जल्द पूरा किया जाए। ताकि मुश्किल की स्थिति न बने। उन्होंने कहा कि मिशन अमृत के समस्त कार्यों कोजितनी जल्दी हो सके उतनी जल्दी पूर्ण किया जाए। पाइप लाइन से वंचित एरिया में पाइप बिछाने के लिए भी निर्देशन  किया।

अभिकर्ता लोकेश चन्द्राकर ने हस्तांतरित करने  से पहले यह फेरबदल न किया जाए कि सारे कार्य जल पूरी  हो। उन्होंने कहा कि जल की बर्बाद को रोकने पर विशेष रूप से काम किया जाए। आयुक्त ने अधिकारी से कहा कि सार्वजनिक नलों में पानी की  बर्बाद बाहर पानी  को रोकने टोटी लगाने और अन्य आवश्यक उपाय अपनाए जाएं। महापौर ने अधिकारियों से कहा कि शहर को शुद्ध पेयजल मिले। इसका विशेष ध्यान रखें। इसके लिए प्रयोगशाला  इत्यादि के सूक्ष्म कलापूर्ण हों। बैठक में जलकार्य प्रभारी संजय कोहले, ईई राजेश पांडेय, भवन अधिकारी प्रकाश चंद थवानी, उप अभियंता भीम राव सहित अन्य मौजूद थे।

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खेत बचाओ अभियान अंतर्गत भोजपुर जिला के दो गांव में किसानों को दिया प्रशिक्षण भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना द्वारा संचालित “खेत बचाओ अभियान” के अंतर्गत भोजपुर जिले के सहार प्रखंड के दो गांवों में किसानों के लिए जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, फसल सुरक्षा तथा मृदा स्वास्थ्य संरक्षण के प्रति जागरूक करना था। अभियान के अंतर्गत पहला कार्यक्रम धनछुआ गांव, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें कुल 30 किसानों ने भाग लिया। प्रतिभागियों में 27 पुरुष एवं 3 महिला किसान शामिल थीं। वहीं दूसरा कार्यक्रम कोनी गांव, चौरी पंचायत, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें 31 किसानों ने सहभागिता की। प्रशिक्षण कार्यक्रम में आईसीएआर-पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना से विशेषज्ञगण डॉ. पंकज कुमार, डॉ. मनोज कुमार त्रिपाठी तथा श्री ए.एस. महापात्रा मौजूद थे। साथ ही, कृषि विज्ञान केंद्र, आरा के विषय वस्तु विशेषज्ञ डॉ. विकास सिंह मौजूद थे। विशेषज्ञों ने किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का प्रयोग करने से फसलों को आवश्यक पोषक तत्व उचित मात्रा में प्राप्त होते हैं, जिससे उत्पादन लागत कम होती है तथा फसल की उत्पादकता में वृद्धि होती है। उन्होंने रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध उपयोग से बचने तथा एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन अपनाने पर बल दिया। कार्यक्रम के दौरान किसानों को हरित खाद के महत्व से भी अवगत कराया गया। वैज्ञानिकों ने बताया कि धैंचा एवं सनई जैसी फसलों का उपयोग हरित खाद के रूप में करने से मिट्टी में जैविक कार्बन एवं नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ती है, मृदा की संरचना में सुधार होता है तथा भूमि की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहती है। उन्होंने किसानों को खरीफ मौसम में धैंचा एवं सनई की खेती कर उन्हें खेत में पलटने की तकनीक एवं उसके लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम के दौरान किसानों की समस्याओं एवं जिज्ञासाओं का समाधान भी किया गया। किसानों ने प्रशिक्षण कार्यक्रम को अति उपयोगी बता, ऐसी जागरुकता गतिविधियों के निरंतर आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया