Tue. Jun 23rd, 2026

छत्‍तीसगढ़ का  बेमेतरा जिला   साजा के  विधानसभा  इलाका के ग्राम  बिरनपुर   में शनिवार को 2  स्कूल वाले  बच्चों के साथ   झगड़ा, मतभेद में भड़क  उठी. । साधरण  झगड़े को लेकर  हिंदू और मुशलमान  समाज  को लेकर एक-दूसरे के समक्ष आ गए। दोनों  के  पक्षों में पहलू  खून  खून  हुआ। इस दौरान एक हिंदू युवक की कत्ल  कर दी गई। घटना में लगभग 12   लोग घायल हुए हैं। दुर्ग आइजी आनंद छाबड़ा सहित बेमेतरा, कवर्धा, राजनांदगांव व दुर्ग के एसपी ने गांव में मोरचा  संभाला है। बेमेतरा के कलेक्टर भीउसी अवसर, पर मौजूद हैं। पुलिस ने 20 में से 9  आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है। गांव में तनाव का माहौल बना हुआ है।

मिली जानकारी के अनुसार दोपहर लगभग 12  बजे 2  स्कूली छात्र बीच सड़क पर साइकिल चला रहे थे। तभी एक ने दूसरे को कट मार दिया। इससे विवाद की स्थिति बनी। इसी बीच मुस्लिम समुदाय के कुछ अन्य लोग वहां पहुंच गए। एक युवक ने हिंदू छात्र के हाथ में बोतल फोड़ दी जिससे उसका हाथ फ्रेक्चर हो गया। सूचना गांव पहुंची तो इस मामूली विवाद ने सांप्रदायिक रंग ले लिया तथा हिंदू व मुशलमान  समुदाय सामाजिक जीवन आमने सामने आ गए। दोनों ओर से लाठी डंडे व पत्थर चलने लगे।

 

 

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खेत बचाओ अभियान अंतर्गत भोजपुर जिला के दो गांव में किसानों को दिया प्रशिक्षण भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना द्वारा संचालित “खेत बचाओ अभियान” के अंतर्गत भोजपुर जिले के सहार प्रखंड के दो गांवों में किसानों के लिए जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, फसल सुरक्षा तथा मृदा स्वास्थ्य संरक्षण के प्रति जागरूक करना था। अभियान के अंतर्गत पहला कार्यक्रम धनछुआ गांव, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें कुल 30 किसानों ने भाग लिया। प्रतिभागियों में 27 पुरुष एवं 3 महिला किसान शामिल थीं। वहीं दूसरा कार्यक्रम कोनी गांव, चौरी पंचायत, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें 31 किसानों ने सहभागिता की। प्रशिक्षण कार्यक्रम में आईसीएआर-पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना से विशेषज्ञगण डॉ. पंकज कुमार, डॉ. मनोज कुमार त्रिपाठी तथा श्री ए.एस. महापात्रा मौजूद थे। साथ ही, कृषि विज्ञान केंद्र, आरा के विषय वस्तु विशेषज्ञ डॉ. विकास सिंह मौजूद थे। विशेषज्ञों ने किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का प्रयोग करने से फसलों को आवश्यक पोषक तत्व उचित मात्रा में प्राप्त होते हैं, जिससे उत्पादन लागत कम होती है तथा फसल की उत्पादकता में वृद्धि होती है। उन्होंने रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध उपयोग से बचने तथा एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन अपनाने पर बल दिया। कार्यक्रम के दौरान किसानों को हरित खाद के महत्व से भी अवगत कराया गया। वैज्ञानिकों ने बताया कि धैंचा एवं सनई जैसी फसलों का उपयोग हरित खाद के रूप में करने से मिट्टी में जैविक कार्बन एवं नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ती है, मृदा की संरचना में सुधार होता है तथा भूमि की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहती है। उन्होंने किसानों को खरीफ मौसम में धैंचा एवं सनई की खेती कर उन्हें खेत में पलटने की तकनीक एवं उसके लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम के दौरान किसानों की समस्याओं एवं जिज्ञासाओं का समाधान भी किया गया। किसानों ने प्रशिक्षण कार्यक्रम को अति उपयोगी बता, ऐसी जागरुकता गतिविधियों के निरंतर आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया