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दुर्ग के छोटे से गांव खोला की रहने वाली 20 वर्षीय देवश्री भारती ने मात्र 13 साल की उम्र में पढ़ाई के लिए घर छोड़ दिया । क्योंकि उसे सिविल सेवा की तैयारी करनी थी। खेल कूद में भी देवश्री निपुण है। हाल ही में आदिवासी नृत्य प्रतियोगिता में हेमचंद विवि को आँल इंडिया लेवल पर 6 वां स्थान पर दिलाया है। गांव में लड़कियों की पढ़ाई पर कोई ध्यान नहीं देता था। पिता किसान था। गांव में प्राथिमिक शिक्षा ली।

आगे की पढ़ाई के लिए स्कूल 8 किलोमीटर दूर था। घर वालों को तैयार कर रोज 8 किलोमीटर साइकिल चलाकर 8 वी तक पढ़ाई पूरी कर ली। उसी दौरान सिविल सेवा में जाने मन में ठान लिया। कि उसकी तैयारी के लिए सबसे कम उम्र मे ही घर छोड़ दिया। तब से आदिवासी कन्या छात्रावास में रहकर स्कूल शिक्षा और स्नातक की। सिविल एग्जाम के लिए उम्र की सीमा नही होने की वजह से एग्जाम देने की तैयारी कर रही हैं।

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