Tue. Jun 23rd, 2026

दुर्ग से राजहरा रेल मार्ग के अंतर्गत मरोदा रेलवे स्टेशन के यार्ड में शुक्रवार को यात्री ट्रेन की एक बोगी पटरी से उतर गया था । दुर्घटना मे बोगी में सवार 12 या 13 लोग से अधिक यात्री घायल हो गया । हादसे की गंभीरता देखते हुए जानकारी रेलवे के आपदा प्रबंधन एवं एनडीआरफ की टीम को भी दी गई। कुछ ही देर में घटना स्थल पर राहत टीम पहुंच गई व बचाने कार्य शुरू किया गया। आम लोगों को बाद में पता चला कि यह सब रेलवे और एनडीआरफ की टीम की संयुक्त माकड्रिल का हिस्सा था। इस दौरान मंडल रेल प्रबंधक भी मौजूद थे।

मरोदा रेलवे स्टेशन पर आज सुबह लगभग 9:25 बजे माक ड्रिल शुरू हुआ। यात्री बोगी पटरी से उतरते हैं रेलवे का स्थानीय अमला सक्रिय हो गया और कंट्रोल रूम को सूचना दिया । इसके बाद मे रेलवे का आपदा प्रबंधन टीम चरोदा यार्ड से रवाना हुआ। इतना ही नहीं एनडीआरएफ कटक थर्ड बटालियन की टीम जो घटना के वक्त दुर्ग में ही थी उन्हें भी सूचना दी गई। हादसे की जानकारी लगते ही डी मंडल रेल प्रबंधक संजीव कुमार भी मौके पर पहुंच गए थे।राहत टीम ने बोगी से यात्रियों को बाहर निकालना शुरू किया। इस दौरान कुछ यात्री ट्रेन में बुरी तरह फंस गए थे। जिन्हें बोगी की खिड़की को कटर से काटकर निकाला गया। मौके पर ही रेलवे का चिकित्सा विभाग भी मौजूद था। घायलों का प्राथमिक उपचार किया गया। गंभीर रूप से घायलों को चरोदा अस्पताल के लिए रिफर किया गया। इस दौरान इस बात का ख्याल रखा गया कि कम से कम समय में प्रभावितों को राहत दी जा सके। राहत एवं बचाव कार्य सहित मरम्मत कार्य जारी है।

Spread the love

Leave a Reply

You missed

खेत बचाओ अभियान अंतर्गत भोजपुर जिला के दो गांव में किसानों को दिया प्रशिक्षण भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना द्वारा संचालित “खेत बचाओ अभियान” के अंतर्गत भोजपुर जिले के सहार प्रखंड के दो गांवों में किसानों के लिए जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, फसल सुरक्षा तथा मृदा स्वास्थ्य संरक्षण के प्रति जागरूक करना था। अभियान के अंतर्गत पहला कार्यक्रम धनछुआ गांव, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें कुल 30 किसानों ने भाग लिया। प्रतिभागियों में 27 पुरुष एवं 3 महिला किसान शामिल थीं। वहीं दूसरा कार्यक्रम कोनी गांव, चौरी पंचायत, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें 31 किसानों ने सहभागिता की। प्रशिक्षण कार्यक्रम में आईसीएआर-पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना से विशेषज्ञगण डॉ. पंकज कुमार, डॉ. मनोज कुमार त्रिपाठी तथा श्री ए.एस. महापात्रा मौजूद थे। साथ ही, कृषि विज्ञान केंद्र, आरा के विषय वस्तु विशेषज्ञ डॉ. विकास सिंह मौजूद थे। विशेषज्ञों ने किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का प्रयोग करने से फसलों को आवश्यक पोषक तत्व उचित मात्रा में प्राप्त होते हैं, जिससे उत्पादन लागत कम होती है तथा फसल की उत्पादकता में वृद्धि होती है। उन्होंने रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध उपयोग से बचने तथा एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन अपनाने पर बल दिया। कार्यक्रम के दौरान किसानों को हरित खाद के महत्व से भी अवगत कराया गया। वैज्ञानिकों ने बताया कि धैंचा एवं सनई जैसी फसलों का उपयोग हरित खाद के रूप में करने से मिट्टी में जैविक कार्बन एवं नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ती है, मृदा की संरचना में सुधार होता है तथा भूमि की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहती है। उन्होंने किसानों को खरीफ मौसम में धैंचा एवं सनई की खेती कर उन्हें खेत में पलटने की तकनीक एवं उसके लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम के दौरान किसानों की समस्याओं एवं जिज्ञासाओं का समाधान भी किया गया। किसानों ने प्रशिक्षण कार्यक्रम को अति उपयोगी बता, ऐसी जागरुकता गतिविधियों के निरंतर आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया