Fri. Dec 2nd, 2022

बेतिया: बिहार राज्य आंगनबाड़ी कर्मचारी यूनियन एटक पश्चिम चम्पारण ने गुरुवार को एक दिवसीय धरना दिया। पश्चिम चम्पारण की आंगनबाड़ी कर्मचारी यूनियन की जिला इकाई ने बारह सूत्री मांगों को लेकर जिला पदाधिकारी के समक्ष एक दिवसीय धरना में समस्याओं पर ध्यान आकृष्ट किया। जिला की आंगनबाड़ी सेविका सहायिका के समस्याओं से जिला पदाधिकारी को अवगत कराया। सेविका सहायिका सरकार की महत्वाकांक्षी योजना आईसीडीएस के लक्ष्यों एवं उदेश्यों को धरातल पर अमलीजामा पहनाने का कार्य करती है। सेविका सहायिका दूसरे के बच्चों को कुपोषण से बचाने का काम करती हैं, सरकार की उदासीनता के कारण उनके बच्चे ही कुपोषण का शिकार हो रहे हैं। उन्हें मानसिक प्रताड़ना का शिकार होना पड रहा है।

एक तरफ उन्हें पेट भरने लायक मानदेय नहीं मिल रहा, दूसरी तरफ केन्द्र को संचालित करने में साधनों के अभाव को भी झेलने के लिए मजबूर होना पड रहा है, तीसरी तरफ जांच के नाम पर उनके हौसले को पस्त किया जा रहा है। केरल की सेविका को 12 हजार तथा सहायिका को 08 हजार मानदेय है। केन्द्र पर आने वाले बच्चों को बैठने के लिए कुर्सी तथा खेल कूद के पर्याप्त साधन व अन्य सुविधाएं हैं। बिहार में तो बच्चों को बैठने के लिए दरी और पाती भी उपलब्ध नहीं है, खाना पकाने के लिए बर्तन भी पर्याप्त नहीं है, सेविका जिस किराये के मकान में केन्द्र चलाती उसका भाडा भी बर्षो से लंबित है। कभी भाडा की राशि आती भी तो विभागीय पदाधिकारी और कार्यालयकर्मी बिना चढावा के भुगतान भी नहीं करते, कभी चढ़ावा के बाद भी भुगतान नहीं मिलता।सेविका से सभी काम एवं प्रतिवेदन आंन लाईन मांगें जा रहे हैं, लेकिन बर्षो पूर्व उनका दिया मोबाइल काम करना बंद कर दिया है। जिसकी शिकायत कोई सुनने वाला कोई नहीं, इन सारी समस्याओं को झेलते हुई भी देश एवं समाजहित में काम करने वाली सेविका सहायिका को केन्द्र जांच, कागज जांच के नाम पर प्रताड़ित किया जाता है। यूनियन लगातार केन्द्रों को साधन सम्पन्न करने की मांग करता रहा है। सेविका सहायिका को तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी का दर्जा देने 24 हजार मानदेय देने। सेविकाओं के खराब मोबाइल को बदलने की मांग को भी उठाता रहा है, लेकिन सरकार एवं विभागीय उच्च स्तरीय पदाधिकारियों की उदासीनता के कारण सेविका सहायिका तंग हो चुकी है। मैट्रिक, इंटर, स्नातक पास सेविका सहायिका को सरकार अकुशल मजदूर भी नहीं समझ रही और उन्हें न्यूनतम मजदूरी भी देने के लिए तैयार नहीं है। इसलिए सेविका सहायिका अपनी फरियाद लेकर माननीय सर्वोच्च न्यायालय में जाने की तैयारी कर रही हैं। पश्चिम चम्पारण के सभी परियोजना कार्यालयों में बैठे कर्मियों ने अपना एक ढांचा तैयार कर लिया है और उसका इस्तेमाल सेविकाओं के शोषण के लिए कर रहे हैं सेविका सहायिका को जो थोड़ा मानदेय भी मिलता है, उसका भी समय से भुगतान नही होने के कारण अधिकांश सेविका सहायिका को आर्थिक संकट से जुझने को विवश हैं। यूनियन सभी केन्द्रों पर खाना पकाने के लिए पर्याप्त बर्तन, बच्चों को बैठने के लिए सामग्री, जीर्ण शीर्ण वजन मशीन, मोबाइल को शीघ्र बदलने की मांग के साथ उपयोग में आने वाले स्टेशनरी के साधनों को उपलब्ध सुनिश्चित करने की मांग करता है। श्रमिक संगठनों की सहमति के बिना जबरन चार श्रम संहिता लागू करने के विरोध के साथ साथ समाज में नफरत फैलाने वाले राजनीति का भी विरोध यूनियन करता है। कुशल दक्ष एवं योग्यता सम्पन्न सेविका को पर्यवेक्षिका एवं सहायिका को सेविका में प्रमोशन देने की मांग करता है। यदि सेविका सहायिका की मांगों पर सरकार गंभीरता से विचार नहीं करती तो यूनियन बाध्य होकर उग्र आंदोलन का रास्ता अपनाएगा। उपर्युक्त विचार जिला स्तरीय सेविका सहायिका के धरना को संबोधित करते हुए, एटक नेता ओम प्रकाश क्रांति, महिला नेत्री, समाजसेवी समीक्षा शर्मा, किसान नेता राधामोहन यादव, बब्लू दूबे, यूनियन की नेत्री स्नेहलता, जिला महासचिव सुमन वर्मा, पम्मी, गोदावरी, माला, रेणु, सीता, मधुबाला, सरिता, अर्पणा, संगीता, हसीना, ममता, निलम, पुष्पा, श्रीदेवी ने व्यक्त किया। धरना की अध्यक्षता संघ की अध्यक्ष सीमा देवी और संचालन अजय वर्मा ने किया।

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By Awadhesh Sharma

न्यूज एन व्यूज फॉर नेशन

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