Tue. Jun 23rd, 2026

बेतिया : पश्चिम चम्पारण जिला मुख्यालय बेतिया अंतर्गत जाड़ा के मौसम ने दस्तक क्या दिया, पशु चोरी की घटनाएं होने लगी। उल्लेखनीय है कि बेतिया नगर में कई ऐसे जगह है, जहां गौ पालकों ने घर गौ पाल रखा है। कुछ गौ पालक दुग्ध व्यवसाय के लिए गौशाला (खटाल) संचालित करते हैं। बेतिया में दर्जनों गोवंश से दुग्ध व्यवसाय संचालित है। गौ और गौवंश पर चोर और कसाइयो की गिद्ध दृष्टि बनी रहती है। अवसर मिलते ही वे लोग गाय और गौवंश पर हाथ साफ कर देते हैं। ऐसा ही एक मामला प्रकाश में आया है। जिसमें राज (देवड़ी) ड्योढी स्थित नगीना खटाल के नाम से वर्षों से संचालित गौशाला, जहां दर्जनों की संख्या में गाय और गोवंश हैं। जिससे वहां दूध बिक्री भी किया जाता है। विगत 10 नवंबर 2022 की रात अज्ञात चोरों ने अर्जुन के खटाल से एक गर्भिणी गाय चुरा लिया। इस बावत अर्जुन यादव ने कालीबाग ओपी थाना को एक आवेदन देकर सीसीटीवी फुटेज में गाय लेकर जा रहे, चोरों पर कार्रवाई करने की मांग किया है। उपर्युक्त घटना के संबंध में एफआईआर कालीबाग ओपी थाना में दर्ज है। अब देखना यह है कि सीसीटीवी फुटेज के आधार पर पुलिस दोषियों पर कार्रवाई करती है, अथवा मामला यूं ही ठंढे बस्ते में डाल देती है, यह तो समय बताएगा।

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By Awadhesh Sharma

न्यूज एन व्यूज फॉर नेशन

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खेत बचाओ अभियान अंतर्गत भोजपुर जिला के दो गांव में किसानों को दिया प्रशिक्षण भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना द्वारा संचालित “खेत बचाओ अभियान” के अंतर्गत भोजपुर जिले के सहार प्रखंड के दो गांवों में किसानों के लिए जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, फसल सुरक्षा तथा मृदा स्वास्थ्य संरक्षण के प्रति जागरूक करना था। अभियान के अंतर्गत पहला कार्यक्रम धनछुआ गांव, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें कुल 30 किसानों ने भाग लिया। प्रतिभागियों में 27 पुरुष एवं 3 महिला किसान शामिल थीं। वहीं दूसरा कार्यक्रम कोनी गांव, चौरी पंचायत, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें 31 किसानों ने सहभागिता की। प्रशिक्षण कार्यक्रम में आईसीएआर-पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना से विशेषज्ञगण डॉ. पंकज कुमार, डॉ. मनोज कुमार त्रिपाठी तथा श्री ए.एस. महापात्रा मौजूद थे। साथ ही, कृषि विज्ञान केंद्र, आरा के विषय वस्तु विशेषज्ञ डॉ. विकास सिंह मौजूद थे। विशेषज्ञों ने किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का प्रयोग करने से फसलों को आवश्यक पोषक तत्व उचित मात्रा में प्राप्त होते हैं, जिससे उत्पादन लागत कम होती है तथा फसल की उत्पादकता में वृद्धि होती है। उन्होंने रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध उपयोग से बचने तथा एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन अपनाने पर बल दिया। कार्यक्रम के दौरान किसानों को हरित खाद के महत्व से भी अवगत कराया गया। वैज्ञानिकों ने बताया कि धैंचा एवं सनई जैसी फसलों का उपयोग हरित खाद के रूप में करने से मिट्टी में जैविक कार्बन एवं नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ती है, मृदा की संरचना में सुधार होता है तथा भूमि की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहती है। उन्होंने किसानों को खरीफ मौसम में धैंचा एवं सनई की खेती कर उन्हें खेत में पलटने की तकनीक एवं उसके लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम के दौरान किसानों की समस्याओं एवं जिज्ञासाओं का समाधान भी किया गया। किसानों ने प्रशिक्षण कार्यक्रम को अति उपयोगी बता, ऐसी जागरुकता गतिविधियों के निरंतर आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया