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इस रैली का इंचार्ज केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह को बनाया गया था, जो घुसपैठ और जनसंख्या में अंसतुलन को लेकर लगातार मुखर रहे हैं. लेकिन अमित शाह के मुख से ऐसे मुद्दे गौण रहे, जिससे समझा जा सकता है कि BJP सीमांचल में राजनीति को नई दिशा में धार देने को लेकर काम कर रही है.

भारतीय जनता पार्टी  की राजनीति अब नई करवट लेने लगी है. का लक्ष्य साल 2024 में 360 से ज्यादा सीटें पाने का है, इसलिए अब मुसलमानों में सेंधमारी की फिराक में है. यही वजह है कि सीमांचल में अक्सर BJP द्वारा प्रयोग किए जाने वाले शब्द अमित शाह के भाषण से गायब दिखे. अमित शाह ने उल्टा विपक्ष के हमले का जवाब ये कहकर दिया कि देश में मोदी की सरकार है इसलिए किसी को डरने की जरूरत नहीं है.

सीमांचल में BJP की हालत अकेले चुनाव लड़ने पर हमेशा से खस्ता रही है. साल 2014 में जनता दल यूनाइटेड (JDU) के बगैर चुनाव लड़ने वाली BJP कटिहार, किशनगंज, अररिया, पूर्णिया सहित मधेपुरा, सहरसा और सुपौल जीत नहीं पाई थी. BJP एक बार फिर साल 2024 में नीतीश कुमार की JDU के बगैर चुनाव लड़ने वाली है. इसलिए BJP के नंबर 2 नेता अमित शाह पूर्णिया में कुछ भी बोलने से बचते नजर आए, जिसे विपक्षी सांप्रदायिक करार देकर मुसलमानों में डर पैदा कर सकें. BJP का टारगेट बिहार में 35 सीटें जीतने का है और ऐसा करने के लिए BJP को अगड़ों सहित पिछड़ों और अतिपिछड़ों के अलावा मुसलमानों के एक तबके का भरोसा जीतना जरूरी लग रहा है. इसलिए अमित शाह सीमांचल पहुंचकर मोदी सरकार द्वारा चलाई गई विकास योजनाओं का बखान करते रहे. वहीं विपक्षी पार्टियों को खराब राजनीति करने के लिए जमकर कोसा. दिलचस्प बात यह है कि इस रैली का इंचार्ज केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह को बनाया गया था. गिरिराज सिंह पिछले कुछ दिनों से घुसपैठ और जनसंख्या में अंसतुलन को लेकर लगातार मुखर सुनाई दिए हैं. लेकिन अमित शाह के मुख से ऐसे मुद्दे गौण रहे, जिससे समझा जा सकता है कि BJP सीमांचल में राजनीति को नई दिशा में धार देने को लेकर काम कर रही है.BJP के केंद्र में मंत्री और बिहार से सांसद नाम नहीं छापने की शर्त पर कहते हैं कि हमारी रणनीति अपने वोटर्स को जोड़े रखने की है, इसलिए गिरिराज सिंह जैसे नेताओं की भी वहां जरूरत है. लेकिन उससे आगे निकलकर उन राष्ट्रवादी मुसलमानों को भी साथ लाना है जो भारत की संस्कृति और सभ्यता को अपनी सभ्यता मानते हैं और भारत देश के प्रति श्रद्धा रखते हैं.जाहिर है BJP की रणनीति में परिवर्तन की झलक तभी दिखाई पड़ गई थी जब लाल किले के प्राचीर से पसमांदा मुसलमानों के पिछड़ेपन को दूर करने की बात कही गई थी. इसलिए कहा जा रहा है कि बीजेपी के दूसरे नंबर के नेता कहे जाने वाले अमित शाह ने मोदी सरकार को गरीबों की सरकार बताकर वो तमाम काम गिना दिए, जिसका फायदा गरीब मुसलमानों को घर, बिजली, गैस सिलेंडर, स्वास्थ्य योजना, शौचालय योजना सहित कोरोना में मुफ्त राशन और डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के जरिए हुआ है. बिहार BJP के प्रवक्ता डॉ रामसागर सिंह कहते हैं कि विपक्ष इस बात से डरा है कि कमंडल के साथ मंडल का समावेश हो चुका है और BJP के प्रयासों से मुसलमानों के बड़े तबके का भरोसा भी जीत लिया गया तो नीतीश कुमार ही नहीं लालू परिवार को भी राजनीति छोड़कर आश्रम की ओर जाने के लिए बाध्य होना पड़ेगा. ज़ाहिर है BJP देश विरोधी ताकतों से निपटने का काम जारी रख रही है, जो कल यानि कि गुरुवार को NIA द्वारा पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) के खिलाफ बिहार के अररिया, पूर्णिया सहित औरंगाबाद और देश के 13 राज्यों में दिखा, लेकिन बड़े नेताओं द्वारा सांप्रदायिक रंग देने से बचा गया. जिससे मुसलमानों के बीच संवाद स्थापित करने में मुश्किल पैदा न हो.

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