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अभियंता दिवस पर गंडक एक और दो के कार्यपालक अभियंता रहे नदारद

बेतिया: भारतीय अभियंत्रण के पितामह मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया का जन्म कर्नाटक राज्य के कोलार जिला के अंतर्गत मुद्दनाहली ग्राम में 15 सितंबर 1861 को एक गरीब ब्राह्मण परिवार में हुआ। इनके पिता का नाम पंडित श्रीनिवास शास्त्री एवं माता का नाम बेगचंपा था। उनकी 15 वर्ष की आयु में पिता की मृत्यु हो गई । परिवार की दयनीय आर्थिक स्थिति में इनकी मां ने परिवार धैर्य पूर्वक संभाला की। इनकी प्रारंभिक स्कूली शिक्षा ग्राम स्तर पर पाई। उपर्युक्त बातें अनिल कुमार, अधीक्षण अभियंता ग्रामीण कार्य विभाग, अंचल ने “अभियंता दिवस” पर आयोजित दिवस समारोह के दौरान दीप प्रज्वलित के दौरान कही। उन्होंने कहा की बंगलोर विश्वविद्यालय के अंतर्गत पुणे अभियंत्रण महाविद्यालय से वर्ष 1883 में प्रथम श्रेणी में प्रथम स्थान प्राप्त कर स्नातक इंजीनियरिंग की डिग्री प्राप्त की। वही वही अनिल राय, एडीएम सह लोक जिला लोक जन शिकायत पदाधिकारी सह जिला आपदा पदाधिकारी ने कहा कि उन्होंने सन 1913 में कोलकाता विश्वविद्यालय एवं 1944 में पटना तथा इलाहाबाद विश्वविद्यालय से डी एस सी की मानद उपाधि प्रदान की गई। इसके अतिरिक्त उन्होंने 1911 में सीआईए का प्रमाण पत्र 1915 में के शि आई का प्रमाण पत्र ,1918 में मुंबई विश्वविद्यालय के आई एल डी की उपाधि प्राप्त की, आगे श्री राय ने कहा कि महाराष्ट्र सरकार के लोक निर्माण विभाग में फरवरी 1984 में सहायक अभियंता के पद पर योगदान दिए और सन 1908 में भारतीय अधीक्षण अभियंता के पद पर प्रोन्नति मिली से अधीक्षण अभियंता पद से सरकारी सेवा से निवृत्त लेने के उपरांत हैदराबाद के निजाम के द्वारा उन्हें मुख्य अभियंता नियुक्त किया गया, 1909 में पहले भारतीय आईसीसी दीवान नियुक्त किए गए। 1912 तक दीवान के रूप में कार्यरत रहे 1927 में टाटा आयरन एंड स्टील कंपनी के निदेशक पद पर नियुक्त रहे। रंजीत कुमार कार्यपालक अभियंता ग्रामीण कार्य प्रमंडल सदर ने तकनीकी क्षेत्र की उपलब्धियां महत्वपूर्ण है। जिसमें सिंध प्रांत के सुकूर ज़िला 1893 में जलापूर्ति एवं बांध का निर्माण एवं में सड़क निर्माण लोक व्यवस्था वितरण का कार्य , बर्बादी रहित नियमित सिंचाई प्रणाली का कार्य हेतु सागर बांध ग्वालियर में बांध का निर्माण बांध में उपयोग किया गया,
चंदन कुमार ,कार्यपालक अभियंता जल नीश्रण बेतिया ने उनके गैर तकनीकी क्षेत्र में उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि 1911 में भारत के नियुक्त विदेश मंत्री की परिषद में सदस्य 1916 में पिछड़े वर्गो के छात्रों के लिए छात्रवृत्ति प्रदान करने हेतु व्यवस्था का व्यवस्थापक 1922 में मुंबई में सर्वदलीय प्रतिनिधियों की राजनीतिक समिति के अध्यक्ष दक्षिणी भारत राज्य के नागरिक परिषद के सदस्य 1927 में भारतीय आर्थिक सम्मेलन मुंबई के अध्यक्ष तथा मुंबई के रांची नगर निगम में छटनी एवं सुधार के प्रभारी ,1929 में बेंगलुरु दंगा जांच समिति के अध्यक्ष। श्यामल देव कुमार कार्यपालक अभियंता पथ निर्माण ने विभिन्न क्षेत्रों प्रकाश डालते हुए कहा कि अंग्रेजी हुकूमत ने इन्हें “सर “की उपाधि प्रदान की। भारत सरकार ने 15 सितंबर को अभियंता दिवस घोषित किया और 1968 को देश का राष्ट्रीय पर्व के रूप में मनाया जाता है। इस मौके पर दीपक कुमार, कार्यपालक अभियंता, पीएचईडी मनीष साक्या, कार्यपालक अभियंता, इलेक्ट्रिक डिपार्टमेंट, सहायक अभियंता, राम नारायण साहू, संजय कुमार, राहुल कुमार, जल निश्रणके सहायक अभियंता फिरोज आजाद ,सचिन कुमार, संदीप कुमार, युवराज कुमार, कुमारी स्मृति, पुल निर्माण निगम के सहा अभियंता साकेत कुमार, नवनीत कुमार, भवन विभाग के सहायक अभियंता आदित्य कुमार, कनीय अभियंता जल निश्रण , प्रमोद कुमार , रामबाबू राजक, दीपक कुमार चौधरी, रविंद्र कुमार, रितेश,कुमार, जल संसाधन तिरहुत कैनाल विभाग के कनीय अभियंता जितेंद्र कुमार वर्मा, रजनीश कुमार संतोष कुमार ,शशी कुमार, पंकज सिंह, पुल निर्माण निगम के कनीय अभियंता रविकांत सिंह ए आर अंसारी, ग्रामीण कार्य विभाग के कनीय अभियंता विपिन कुमार, रामदुलार चौहान, नगेंद्र कुमार आदि मौजूद रहे। इस अभियंता दिवास समारोह में जल संसाधन विभाग के एक और दो के कार्यपालक अभियंता नहीं दिखे जिसको लेकर तरह-तरह की चर्चाएं का बाजार गर्म है।

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By Awadhesh Sharma

न्यूज एन व्यूज फॉर नेशन

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