Wed. Jun 24th, 2026

विधानसभा चुनाव 2023 को लेकर जिला प्रबंधन ने अपनी तैयारी शुरू कर दिया गया  है। चुनाव में  लगभग 16 हजार से अधिक अधिकारी-कार्यकर्ता के  ड्यूटी लगाया  जा सकते  है। इसके लिए जिला चुनाव, विभाग वस्तु  जिला भर के अधिकारी-मज़दूरो  का कैटेगरी आंकड़ाकोष एक आंकड़ो का सुनियोजित संग्रह   तैयार कर रहा है। अधिकारी-मज़दूरो  के पद, नाम, पता, वेतन से लेकर पहले वे चुनाव में ड्यूटी किए हैं कि नहीं। सब जानकारी भरे  जा रहे  है। इसी के आधार पर ऑनलाइन माध्यम से ही सबके  ड्यूटी भी लगा दी जाएगे । पूरा प्रोसेस माध्यम से ऑनलाइन कर दिया गया है। हालांकि ड्यूटी लगने के बाद जिन्हें ड्यूटी से अपना नाम हटवाना होगा, उनके लिए ऑनलाइन में कोई जगह नहीं है।

उन्हें ऑफलाइन ही आवेदन करना होगा। इसके लिए एक साॅफ्टवेयर तैयार किया गया है। जिसका एक-एक आईडी गुप्तशब्द का  पासवर्ड दुर्ग जिले के स्कूल, कॉलेज से लेकर सभी विभाग में दिया गया है। और  आईडी पासवर्ड के ज़रिया  से हर विभाग अपने विभाग के एक क्लास अधिकारी से लेकर बाबू-चपरासी तक की पूरी जानकारी भरवा जा रहा है। ताकि कैटेगरी वाइस चुनाव में ड्यूटी लगाई जा सके और जिले भर मे  सभी विधानसभा में मतदान दलों का गठन किया जा सके।

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खेत बचाओ अभियान अंतर्गत भोजपुर जिला के दो गांव में किसानों को दिया प्रशिक्षण भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना द्वारा संचालित “खेत बचाओ अभियान” के अंतर्गत भोजपुर जिले के सहार प्रखंड के दो गांवों में किसानों के लिए जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, फसल सुरक्षा तथा मृदा स्वास्थ्य संरक्षण के प्रति जागरूक करना था। अभियान के अंतर्गत पहला कार्यक्रम धनछुआ गांव, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें कुल 30 किसानों ने भाग लिया। प्रतिभागियों में 27 पुरुष एवं 3 महिला किसान शामिल थीं। वहीं दूसरा कार्यक्रम कोनी गांव, चौरी पंचायत, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें 31 किसानों ने सहभागिता की। प्रशिक्षण कार्यक्रम में आईसीएआर-पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना से विशेषज्ञगण डॉ. पंकज कुमार, डॉ. मनोज कुमार त्रिपाठी तथा श्री ए.एस. महापात्रा मौजूद थे। साथ ही, कृषि विज्ञान केंद्र, आरा के विषय वस्तु विशेषज्ञ डॉ. विकास सिंह मौजूद थे। विशेषज्ञों ने किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का प्रयोग करने से फसलों को आवश्यक पोषक तत्व उचित मात्रा में प्राप्त होते हैं, जिससे उत्पादन लागत कम होती है तथा फसल की उत्पादकता में वृद्धि होती है। उन्होंने रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध उपयोग से बचने तथा एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन अपनाने पर बल दिया। कार्यक्रम के दौरान किसानों को हरित खाद के महत्व से भी अवगत कराया गया। वैज्ञानिकों ने बताया कि धैंचा एवं सनई जैसी फसलों का उपयोग हरित खाद के रूप में करने से मिट्टी में जैविक कार्बन एवं नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ती है, मृदा की संरचना में सुधार होता है तथा भूमि की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहती है। उन्होंने किसानों को खरीफ मौसम में धैंचा एवं सनई की खेती कर उन्हें खेत में पलटने की तकनीक एवं उसके लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम के दौरान किसानों की समस्याओं एवं जिज्ञासाओं का समाधान भी किया गया। किसानों ने प्रशिक्षण कार्यक्रम को अति उपयोगी बता, ऐसी जागरुकता गतिविधियों के निरंतर आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया