Tue. Jun 23rd, 2026

नगर निगम भिलाई का  महापौर नीरज पाल ने बृहस्पतिवार  को 760 करोड़ का बजट प्रस्ताव किया। इस बजट में जहां हर श्रेणी, के लोगों का ध्यान रखा गया। शहर के विकास को को लेकर बजट दिया वहीं भिलाई नगर निगम छत्तीसगढ़ का ऐसा पहले  निगम बन गया है, जो आईआईटी के साथ लिडार सर्वे को लेकर  संविदा,करेगा।

महापौर नीरज पाल ने कहा कि नगर  निगम भिलाई एक ऐसा पुराना  नगर निगम होगा जो आईआईटी के साथ मिलकर लिडार सर्वे के लिए समझौता करेगा। आधुनिक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण संदर्श से लिडार सर्वे के माध्यम से भिलाई विकास की नई ऊंचाइयों को छुएगा। यह एक ऐसा हाईटेक टेक्नोलॉजी का सर्वे है जिसके माध्यम से क्षेत्र के बारे में  जटिल जानकारी पता लगाकर उसके विकास को नई दिशा में ले जाया जा सकता है। भिलाई निगम का शहर विकास के लिए यह बड़ा कदम होगा।

इसके साथ ही बजट में सर्वसुविधा युक्त प्रथम 1000 लोगों के बैठने की क्षमता वाला ऑडिटोरियम कम सेंट्रल लाइब्रेरी के निर्माण कार्य हेतु राशि बीस करोड़ प्रस्तावित है। इसका उपयोग युवाओं द्वारा नाट्य कला, नृत्य एवं संगीत, शिक्षा, साहित्य इत्यादि कार्यक्रमों में किया जायेगा।

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खेत बचाओ अभियान अंतर्गत भोजपुर जिला के दो गांव में किसानों को दिया प्रशिक्षण भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना द्वारा संचालित “खेत बचाओ अभियान” के अंतर्गत भोजपुर जिले के सहार प्रखंड के दो गांवों में किसानों के लिए जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, फसल सुरक्षा तथा मृदा स्वास्थ्य संरक्षण के प्रति जागरूक करना था। अभियान के अंतर्गत पहला कार्यक्रम धनछुआ गांव, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें कुल 30 किसानों ने भाग लिया। प्रतिभागियों में 27 पुरुष एवं 3 महिला किसान शामिल थीं। वहीं दूसरा कार्यक्रम कोनी गांव, चौरी पंचायत, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें 31 किसानों ने सहभागिता की। प्रशिक्षण कार्यक्रम में आईसीएआर-पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना से विशेषज्ञगण डॉ. पंकज कुमार, डॉ. मनोज कुमार त्रिपाठी तथा श्री ए.एस. महापात्रा मौजूद थे। साथ ही, कृषि विज्ञान केंद्र, आरा के विषय वस्तु विशेषज्ञ डॉ. विकास सिंह मौजूद थे। विशेषज्ञों ने किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का प्रयोग करने से फसलों को आवश्यक पोषक तत्व उचित मात्रा में प्राप्त होते हैं, जिससे उत्पादन लागत कम होती है तथा फसल की उत्पादकता में वृद्धि होती है। उन्होंने रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध उपयोग से बचने तथा एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन अपनाने पर बल दिया। कार्यक्रम के दौरान किसानों को हरित खाद के महत्व से भी अवगत कराया गया। वैज्ञानिकों ने बताया कि धैंचा एवं सनई जैसी फसलों का उपयोग हरित खाद के रूप में करने से मिट्टी में जैविक कार्बन एवं नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ती है, मृदा की संरचना में सुधार होता है तथा भूमि की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहती है। उन्होंने किसानों को खरीफ मौसम में धैंचा एवं सनई की खेती कर उन्हें खेत में पलटने की तकनीक एवं उसके लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम के दौरान किसानों की समस्याओं एवं जिज्ञासाओं का समाधान भी किया गया। किसानों ने प्रशिक्षण कार्यक्रम को अति उपयोगी बता, ऐसी जागरुकता गतिविधियों के निरंतर आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया