Wed. Jun 24th, 2026

पति के साथ थाने में सूचना देने गई महिला वंदना देवांगन ने थाने के बाथरूम में खुद को बंद करके फिनायल पीकर आत्महत्या करने की कोशिश की है । जब महिला बाहर नहीं निकली तो दरवाजा तोड़कर उसे बाहर निकाला गया। इसके बाद उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया। पति डोमन निवासी महावीर चौक छावनी के मुताबिक पत्नी की तबीयत बिगड़ने पर उसे 14 फरवरी को निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

17 फरवरी की शाम  लगभग 3  बजे छूटी  होने के बाद अस्पताल के गेट से पत्नी अचानक गायब हो गई थी। इसके बाद शनिवार सुबह पत्नी नंदिनी रोड में मिली। दोनों महिला थाने में पत्नी के मिल जाने की सूचना देने गए थे। पत्नी पहले से ही फिनायल खरीदकर रखी हुई थी। पत्नी की मानसिक हालत ठीक नहीं है। शादी के 15 दिन बाद भी पत्नी ने एक बार फिनायल पी लिया था। इधर, पुलिस के मुताबिक वंदना की मां उषा ने 13 जनवरी 2021 को थाने में एक लिखित शिकायत की थी। उषा ने बताया था कि बेटी की शादी 20 मई 2022 को डोमन के साथ हुआ था। शादी के बाद से उसकी बेटी को पति, सास और डेढ़ सास परेशान करने लगे थे। मायके वालों से बात नहीं करने देते थे। मारपीट करके प्रताड़ित करते थे। लड़के की उम्र कम बताकर धोखाधड़ी से शादी कर दिए। जिसके बाद वंदना और उसके पति को 4 फरवरी को काउंसलिंग के लिए महिला थाने बुलाया गया था। अगले दिन काउंसलिंग रजिस्टर में आपसी समझौता करके वंदना अपने पति के साथ घर चली गई थी।

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खेत बचाओ अभियान अंतर्गत भोजपुर जिला के दो गांव में किसानों को दिया प्रशिक्षण भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना द्वारा संचालित “खेत बचाओ अभियान” के अंतर्गत भोजपुर जिले के सहार प्रखंड के दो गांवों में किसानों के लिए जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, फसल सुरक्षा तथा मृदा स्वास्थ्य संरक्षण के प्रति जागरूक करना था। अभियान के अंतर्गत पहला कार्यक्रम धनछुआ गांव, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें कुल 30 किसानों ने भाग लिया। प्रतिभागियों में 27 पुरुष एवं 3 महिला किसान शामिल थीं। वहीं दूसरा कार्यक्रम कोनी गांव, चौरी पंचायत, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें 31 किसानों ने सहभागिता की। प्रशिक्षण कार्यक्रम में आईसीएआर-पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना से विशेषज्ञगण डॉ. पंकज कुमार, डॉ. मनोज कुमार त्रिपाठी तथा श्री ए.एस. महापात्रा मौजूद थे। साथ ही, कृषि विज्ञान केंद्र, आरा के विषय वस्तु विशेषज्ञ डॉ. विकास सिंह मौजूद थे। विशेषज्ञों ने किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का प्रयोग करने से फसलों को आवश्यक पोषक तत्व उचित मात्रा में प्राप्त होते हैं, जिससे उत्पादन लागत कम होती है तथा फसल की उत्पादकता में वृद्धि होती है। उन्होंने रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध उपयोग से बचने तथा एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन अपनाने पर बल दिया। कार्यक्रम के दौरान किसानों को हरित खाद के महत्व से भी अवगत कराया गया। वैज्ञानिकों ने बताया कि धैंचा एवं सनई जैसी फसलों का उपयोग हरित खाद के रूप में करने से मिट्टी में जैविक कार्बन एवं नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ती है, मृदा की संरचना में सुधार होता है तथा भूमि की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहती है। उन्होंने किसानों को खरीफ मौसम में धैंचा एवं सनई की खेती कर उन्हें खेत में पलटने की तकनीक एवं उसके लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम के दौरान किसानों की समस्याओं एवं जिज्ञासाओं का समाधान भी किया गया। किसानों ने प्रशिक्षण कार्यक्रम को अति उपयोगी बता, ऐसी जागरुकता गतिविधियों के निरंतर आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया