Wed. Jun 24th, 2026
सरकार रोगी से अच्छा व्यवहार करें, आप कहने पर भड़क रहे चिकित्सक


ड्रेस कोड में नहीं रहने पर डॉक्टर कौन हैं पूछना अपराध तो नहीं

बेतिया: पश्चिम चंपारण जिला के नरकटियागंज जाने वाली अस्पताल में चिकित्सकों के लिए कोई ड्रेस कोड लागू नहीं है। ऐसे में कोई व्यक्ति यदि पूछ लेकिन में चिकित्सक कौन हैं तो उनके साथ समुचित व्यवहार तक नहीं किया जाता। समाज के लिए खून उपलब्ध कराने वाले युवक जब इलाज के लिए अस्पताल पहुंचते हैं तो उनसे ऐसा व्यवहार किया जाता है, मानो चिकित्सक नहीं असमाजिक तत्व हो। नरकटियागंज अनुमंडलीय अस्पताल का वातावरण कुछ इस कदर बन गया है कि समाज के प्रबुद्धजनों को अस्पताल के चिकित्सक के बात का लहजा इतना गलत है तो आमजन की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है। आखिर अब लोग क्या करें आधुनिक बिना ड्रेस कोड का अनुपालन किए चिकित्सक से आप कहकर बात करना गुनाह है। चिकित्सक किसी को तुम कहे तो यह संस्कारी चिकित्सक नीतीश कुमार की चिकित्सा के लायक है। उन्हे जिला में सिविल सर्जन और जिला पदाधिकारी के चिकित्सा की आवश्यकता है। इस बाबत सिविल सर्जन बेतिया के कॉल रिसीव नहीं करने से उनकी प्रतिक्रिया नहीं मिल सकी।

Spread the love

By Awadhesh Sharma

न्यूज एन व्यूज फॉर नेशन

Leave a Reply

You missed

खेत बचाओ अभियान अंतर्गत भोजपुर जिला के दो गांव में किसानों को दिया प्रशिक्षण भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना द्वारा संचालित “खेत बचाओ अभियान” के अंतर्गत भोजपुर जिले के सहार प्रखंड के दो गांवों में किसानों के लिए जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, फसल सुरक्षा तथा मृदा स्वास्थ्य संरक्षण के प्रति जागरूक करना था। अभियान के अंतर्गत पहला कार्यक्रम धनछुआ गांव, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें कुल 30 किसानों ने भाग लिया। प्रतिभागियों में 27 पुरुष एवं 3 महिला किसान शामिल थीं। वहीं दूसरा कार्यक्रम कोनी गांव, चौरी पंचायत, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें 31 किसानों ने सहभागिता की। प्रशिक्षण कार्यक्रम में आईसीएआर-पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना से विशेषज्ञगण डॉ. पंकज कुमार, डॉ. मनोज कुमार त्रिपाठी तथा श्री ए.एस. महापात्रा मौजूद थे। साथ ही, कृषि विज्ञान केंद्र, आरा के विषय वस्तु विशेषज्ञ डॉ. विकास सिंह मौजूद थे। विशेषज्ञों ने किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का प्रयोग करने से फसलों को आवश्यक पोषक तत्व उचित मात्रा में प्राप्त होते हैं, जिससे उत्पादन लागत कम होती है तथा फसल की उत्पादकता में वृद्धि होती है। उन्होंने रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध उपयोग से बचने तथा एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन अपनाने पर बल दिया। कार्यक्रम के दौरान किसानों को हरित खाद के महत्व से भी अवगत कराया गया। वैज्ञानिकों ने बताया कि धैंचा एवं सनई जैसी फसलों का उपयोग हरित खाद के रूप में करने से मिट्टी में जैविक कार्बन एवं नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ती है, मृदा की संरचना में सुधार होता है तथा भूमि की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहती है। उन्होंने किसानों को खरीफ मौसम में धैंचा एवं सनई की खेती कर उन्हें खेत में पलटने की तकनीक एवं उसके लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम के दौरान किसानों की समस्याओं एवं जिज्ञासाओं का समाधान भी किया गया। किसानों ने प्रशिक्षण कार्यक्रम को अति उपयोगी बता, ऐसी जागरुकता गतिविधियों के निरंतर आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया