Wed. Jun 24th, 2026

दोनों देशों के प्रशासन ने इस निमंत्रण को सैद्धांतिक रूप से स्वीकार भी कर लिया है। माना जा रहा है कि दोनों पक्षों के अधिकारी जून-जुलाई की उपयुक्त तारीखों पर चर्चा कर रहे हैं, जब प्रधानमंत्री मोदी की के पास कोई पूर्व नियोजित अंतरराष्ट्रीय यात्रा व घरेलू व्यस्तता नहीं है।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस साल गर्मियों में अमेरिका की यात्रा कर सकते हैं। हालांकि, यात्रा की तारीखों को लेकर अभी स्पष्टता नहीं है और दोनों देशों के अधिकारी इस पर काम कर रहे हैं। सूत्रों की मानें तो अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन की ओर से प्रधानमंत्री मोदी को अमेरिका यात्रा का निमंत्रण भेजा गया है। दोनों देशों के प्रशासन ने इस निमंत्रण को सैद्धांतिक रूप से स्वीकार भी कर लिया है। माना जा रहा है कि दोनों पक्षों के अधिकारी जून-जुलाई की उपयुक्त तारीखों पर चर्चा कर रहे हैं, जब न केवल अमेरिकी प्रतिनिधि सभा और सीनेट के दोनों आयोजित होने हैं, साथ ही प्रधानमंत्री मोदी की के पास भी कोई पूर्व नियोजित अंतरराष्ट्रीय यात्रा व घरेलू व्यस्तता नहीं है। बता दें, राजकीय यात्रा के लिए कम से कम कुछ दिनों की आवश्यकता होती है, जिसमें अन्य बातों के अलावा अमेरिकी कांग्रेस के संयुक्त सत्र को संबोधित करना और व्हाइट हाउस में राजकीय रात्रिभोज शामिल है। हालांकि, इस मुद्दे पर सूत्रों का कहना है कि यह स्पष्ट नहीं है कि प्रधानमंत्री मोद को यह निमंत्रण कब दिया गया और बाइडन कार्यालय की ओर से किसने उन्हें व्यक्तिगत निमंत्रण दिया।

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खेत बचाओ अभियान अंतर्गत भोजपुर जिला के दो गांव में किसानों को दिया प्रशिक्षण भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना द्वारा संचालित “खेत बचाओ अभियान” के अंतर्गत भोजपुर जिले के सहार प्रखंड के दो गांवों में किसानों के लिए जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, फसल सुरक्षा तथा मृदा स्वास्थ्य संरक्षण के प्रति जागरूक करना था। अभियान के अंतर्गत पहला कार्यक्रम धनछुआ गांव, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें कुल 30 किसानों ने भाग लिया। प्रतिभागियों में 27 पुरुष एवं 3 महिला किसान शामिल थीं। वहीं दूसरा कार्यक्रम कोनी गांव, चौरी पंचायत, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें 31 किसानों ने सहभागिता की। प्रशिक्षण कार्यक्रम में आईसीएआर-पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना से विशेषज्ञगण डॉ. पंकज कुमार, डॉ. मनोज कुमार त्रिपाठी तथा श्री ए.एस. महापात्रा मौजूद थे। साथ ही, कृषि विज्ञान केंद्र, आरा के विषय वस्तु विशेषज्ञ डॉ. विकास सिंह मौजूद थे। विशेषज्ञों ने किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का प्रयोग करने से फसलों को आवश्यक पोषक तत्व उचित मात्रा में प्राप्त होते हैं, जिससे उत्पादन लागत कम होती है तथा फसल की उत्पादकता में वृद्धि होती है। उन्होंने रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध उपयोग से बचने तथा एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन अपनाने पर बल दिया। कार्यक्रम के दौरान किसानों को हरित खाद के महत्व से भी अवगत कराया गया। वैज्ञानिकों ने बताया कि धैंचा एवं सनई जैसी फसलों का उपयोग हरित खाद के रूप में करने से मिट्टी में जैविक कार्बन एवं नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ती है, मृदा की संरचना में सुधार होता है तथा भूमि की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहती है। उन्होंने किसानों को खरीफ मौसम में धैंचा एवं सनई की खेती कर उन्हें खेत में पलटने की तकनीक एवं उसके लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम के दौरान किसानों की समस्याओं एवं जिज्ञासाओं का समाधान भी किया गया। किसानों ने प्रशिक्षण कार्यक्रम को अति उपयोगी बता, ऐसी जागरुकता गतिविधियों के निरंतर आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया