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शिक्षक सम्मान समारोह प्रतिभावान शिक्षकों के साथ न्याय कर पाया..?
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बेतिया : शिक्षक दिवस के अवसर पर 5 सितम्बर 2026 को पश्चिम चम्पारण जिला में आयोजित शिक्षक सम्मान समारोह सम्पन्न हो गया। अब शिक्षक सम्मान के लिए प्रशासन के चयन प्रक्रिया को लेकर प्रबुद्धजन प्रश्न करने लगे हैं। पश्चिम चम्पारण जिला के कई शिक्षाविद और सामाजिक संगठन का मानना है कि शिक्षक सम्मान केवल कार्यक्रम की औपचारिकता निर्वहन करना नहीं, अपितु उन शिक्षकों के प्रति समाज और शासन का सम्मान है, जिन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया है। ऐसे में पुरस्कारों के चयन में पारदर्शिता और निष्पक्षता अत्यावश्यक जाती है। इस संदर्भ में राधिका-चंचल फाउंडेशन, बेतिया (रजि.), बिहार ने जिला प्रशासन से प्रश्न किया हैं कि शिक्षक सम्मान के लिए चयन समिति का गठन किस आधार पर किया गया, समिति में कौन-कौन सदस्य रहे और चयन का निर्धारित मापदंड क्या रहा ?
फाउंडेशन का कहना है कि यदि चयन प्रक्रिया निर्धारित नियमों, उपलब्धियों और पारदर्शी मूल्यांकन के आधार पर हुई है, तो उसके आधार और चयनित शिक्षकों का विवरण सार्वजनिक करने में किसी प्रकार की आपत्ति नहीं होनी चाहिए। इससे न केवल सम्मानित शिक्षकों की प्रतिष्ठा बढ़ेगी, बल्कि पूरी प्रक्रिया के प्रति समाज का विश्वास बढ़ेगा।
सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि क्या इस वर्ष वास्तव में जिला के सबसे प्रतिभावान, समर्पित और उल्लेखनीय कार्य करने वाले शिक्षक एवं शिक्षिका को सम्मानित किया गया? यदि किसी योग्य शिक्षक को सम्मान से वंचित किया गया और किसी ऐसे व्यक्ति को सम्मान मिल गया, जिसकी उपलब्धियां निर्धारित मापदंडों के अनुरुप नहीं है, तो यह गंभीर प्रशासनिक प्रश्न बन जाता है।
यह भी स्पष्ट किया जाना आवश्यक है कि चयन के लिए किन-किन क्षेत्रों को महत्व दिया गया—शिक्षण गुणवत्ता, विद्यार्थियों के परिणाम, नवाचार, शोध, विद्यालय विकास, सामाजिक योगदान, उपस्थिति, डिजिटल शिक्षा, कमजोर विद्यार्थियों के लिए विशेष प्रयास अथवा कोई अन्य निर्धारित मानक। राधिका-चंचल फाउंडेशन ने सरकार और जिला प्रशासन से माँग किया है कि यदि शिक्षक सम्मान में किसी स्तर पर गलत चयन हुआ है अथवा निर्धारित मानक की अनदेखी की गई है, तो उसकी निष्पक्ष जाँच कराई जानी चाहिए। जाँच का उद्देश्य किसी सम्मानित शिक्षक को अपमानित करना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना होना चाहिए कि भविष्य में वास्तविक प्रतिभा और उत्कृष्ट कार्य करने वाले शिक्षकों को सम्मान मिले।
शिक्षक समाज का निर्माण करते हैं। इसलिए शिक्षक सम्मान की गरिमा बनाए रखना प्रशासन और समाज दोनों का उत्तरदायित्व है। पुरस्कार किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा बढ़ाने के साथ-साथ आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा भी बनता है। यदि चयन प्रक्रिया पर प्रश्न उठते हैं और उनका संतोषजनक उत्तर नहीं मिलता, तो इससे पूरे सम्मान समारोह की विश्वसनीयता प्रभावित हो सकती है।
अब सबकी दृष्टि जिला प्रशासन और राज्य सरकार पर टिकी है कि वह चयन समिति, चयन के मापदंड तथा चयनित शिक्षकों का विवरण सार्वजनिक कर पारदर्शिता सुनिश्चित करती है या नहीं।
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By Awadhesh Sharma

न्यूज एन व्यूज फॉर नेशन

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