Tue. Jun 23rd, 2026

तेली अधिकार सम्मेलन सह सम्मान समारोह का आयोजन

अनमोल कुमार/apnibaat.org

पटना: बिहार की राजधानी पटना स्थित गाँधी मैदान के पास श्रीकृष्ण मेमोरियल हाॅल में तेली अधिकार सह सम्मान समारोह आयोजित किया गया। जिसमें तेली समाज के केंद्रीय राज्य मंत्री भारत सरकार तोखन साहू, छत्तीसगढ के उप मुख्यमंत्री अरूण साव, बिहार सरकार में मंत्री मोती लाल प्रसाद, एमएलसी पूर्व लाल बाबू प्रसाद, पूर्व मंत्री रामनारायण मंडल, छपरा विधायक डॉ. सीएन गुप्ता, विधायक रामचन्द्र प्रसाद भाजपा बिहार के प्रदेश अध्यक्ष दिलिप जायसवाल पटना के मेयर सीता साहु एवं राज्य सभा सांसद धर्मशीला गुप्ता के साथ समाज के अनेकों बड़े नेता उपस्थित रहे। समाज के सभी सम्मानित श्रेष्ठजनों का भव्य स्वागत किया गया। समाज के सभी लोगों ने इस मंच से सभी पार्टियों से तेली समाज को आवादी के अनुसार राजनीति में भागीदारी देने पर बल दिया।सभागार में हजारों लोग श्यामासभा का नेतृत्व नितिन अभिषेक साहू एवं भीम साहु ने किया।

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By Awadhesh Sharma

न्यूज एन व्यूज फॉर नेशन

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खेत बचाओ अभियान अंतर्गत भोजपुर जिला के दो गांव में किसानों को दिया प्रशिक्षण भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना द्वारा संचालित “खेत बचाओ अभियान” के अंतर्गत भोजपुर जिले के सहार प्रखंड के दो गांवों में किसानों के लिए जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, फसल सुरक्षा तथा मृदा स्वास्थ्य संरक्षण के प्रति जागरूक करना था। अभियान के अंतर्गत पहला कार्यक्रम धनछुआ गांव, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें कुल 30 किसानों ने भाग लिया। प्रतिभागियों में 27 पुरुष एवं 3 महिला किसान शामिल थीं। वहीं दूसरा कार्यक्रम कोनी गांव, चौरी पंचायत, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें 31 किसानों ने सहभागिता की। प्रशिक्षण कार्यक्रम में आईसीएआर-पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना से विशेषज्ञगण डॉ. पंकज कुमार, डॉ. मनोज कुमार त्रिपाठी तथा श्री ए.एस. महापात्रा मौजूद थे। साथ ही, कृषि विज्ञान केंद्र, आरा के विषय वस्तु विशेषज्ञ डॉ. विकास सिंह मौजूद थे। विशेषज्ञों ने किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का प्रयोग करने से फसलों को आवश्यक पोषक तत्व उचित मात्रा में प्राप्त होते हैं, जिससे उत्पादन लागत कम होती है तथा फसल की उत्पादकता में वृद्धि होती है। उन्होंने रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध उपयोग से बचने तथा एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन अपनाने पर बल दिया। कार्यक्रम के दौरान किसानों को हरित खाद के महत्व से भी अवगत कराया गया। वैज्ञानिकों ने बताया कि धैंचा एवं सनई जैसी फसलों का उपयोग हरित खाद के रूप में करने से मिट्टी में जैविक कार्बन एवं नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ती है, मृदा की संरचना में सुधार होता है तथा भूमि की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहती है। उन्होंने किसानों को खरीफ मौसम में धैंचा एवं सनई की खेती कर उन्हें खेत में पलटने की तकनीक एवं उसके लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम के दौरान किसानों की समस्याओं एवं जिज्ञासाओं का समाधान भी किया गया। किसानों ने प्रशिक्षण कार्यक्रम को अति उपयोगी बता, ऐसी जागरुकता गतिविधियों के निरंतर आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया