‘खेत बचाओ अभियान’ अंतर्गत भोजपुर के धमार और खजुरिया गाँव में किसान जागरूकता कार्यक्रम आयोजित
आरा के दो गाँव में 73 किसान शामिल हुए, मृदा स्वास्थ्य, जैविक कार्बन संवर्धन एवं टिकाऊ कृषि पद्धतियों पर बल दिया गया 
apnibaat.org
पटना: भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना द्वारा दिनांक 05 नवंबर, 2026 को ‘खेत बचाओ अभियान’ अंतर्गत भोजपुर जिला के आरा प्रखण्ड के धमार एवं खजुरिया गाँवों में किसान जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में कुल 73 किसान शामिल हुए, जिनमें धमार गाँव के 30 तथा खजुरिया गाँव के 38 पुरुष एवं 5 महिला किसान शामिल हुईं। उपर्युक्त कार्यक्रम परिसर के निदेशक डॉ. अनुप दास के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया। कार्यक्रम के क्रम में कृषि विशेषज्ञों ने मृदा स्वास्थ्य के संरक्षण एवं सुधार पर विशेष बल देते हुए मृदा में जैविक कार्बन की मात्रा बढ़ाने, मृदा परीक्षण आधारित पोषक तत्व प्रबंधन, एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन, हरी खाद एवं प्राकृतिक खेती जैसी टिकाऊ कृषि पद्धतियों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इन उपायों को अपनाकर मृदा क्षरण को कम करने, मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने तथा खेती की बढ़ती लागत को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है। इसके अतिरिक्त, किसानों को समेकित कृषि प्रणाली तथा अजोला जैसे वैकल्पिक जैव-संसाधनों के उपयोग के बारे में बताया गया। विशेषज्ञों ने अजोला को नाइट्रोजन स्थिरीकरण में सहायक जैव-संसाधन एवं प्रोटीन से भरपूर पशु आहार के रूप में अपनाने की उपयोगिता बताई। पशुपालन एवं मुर्गीपालन को अधिक लाभकारी बनाने के लिए पशु स्वास्थ्य प्रबंधन, समय पर टीकाकरण, कृमिनाशन, स्वच्छ पेयजल, उचित आवास व्यवस्था, जैव-सुरक्षा तथा अजोला आधारित कम लागत वाले चारे के महत्व पर भी विस्तार से चर्चा की गई।
कार्यक्रम के अंत में किसानों के साथ सहभागी संवाद सत्र आयोजित किया गया।
इस दौरान धमार एवं खजुरिया गाँव के किसानों ने अभियान की प्रशंसा करते हुए बताया कि हरी खाद के प्रयोग से यूरिया के उपयोग में कमी लाने में मदद मिली है। खजुरिया गाँव की महिला किसानों ने विशेष रूप से मुर्गीपालन प्रबंधन एवं अजोला आधारित चारा उत्पादन में रुचि दिखाई। इन कार्यक्रमों का नेतृत्व डॉ. शंकर दयाल, प्रधान वैज्ञानिक, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना ने किया।
