
पटना : भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना के निदेशक डॉ अनुप दास के नेतृत्व में कृषि अनुसंधान परिसर, पटना के वैज्ञानिकों की टीम ने सारण एवं वैशाली जिला में प्रारंभिक बाढ़ क्षति का आकलन किया। कृषि अनुसंधान परिसर पटना के तीन वैज्ञानिक की बहुविषयक टीम, जिसमें डॉ. अजय कुमार, डॉ. रोहन कुमार रमण एवं डॉ. राकेश कुमार शामिल रहे, उन्होंने 22 सितंबर 2026 को सारण एवं वैशाली जिला के बाढ़ प्रभावित गाँवों का क्षेत्रीय भ्रमण किया। टीम ने गंगा एवं गंडक नदियों के बाढ़ के पानी से कृषि फसलों, बागवानी फसलों तथा कुछ सीमा तक पशुधन पर पड़े प्रभाव का प्रारंभिक आकलन किया।
सारण जिला के हसनपुर, गोपालपुर एवं रसूलपुर गांवों में धान, मक्का, भिंडी, नेनुआ एवं लौकी की फसलों का अवलोकन किया। 10–15 दिनों तक 4–5 फीट जलभराव के कारण सब्जी फसल को गंभीर से लेकर पूर्ण क्षति हुई, जो 100 प्रतिशत तक आंकी गई। खेत की स्थिति के आधार पर मक्का की फसल में लगभग 60–90 प्रतिशत तक क्षति देखी गई। 1–2 फीट तक पानी के जमाव वाले धान के खेतों में पौधों की संख्या कम एवं असमान पाई गई, जिससे संभावित उपज हानि का संकेत मिलता है।
वैशाली जिला के अकिलाबाद एवं बकापुर गांवों में मुख्यतः केला की खेती की जाती है। लगभग 12–18 दिनों तक 2–4 फीट पानी के जलभराव से केला के पौधों पर गंभीर प्रभाव पड़ा है। इससे पौधों की वृद्धि, फलों के आकार, घौद के वजन तथा बाजार योग्य उपज में कमी आने की संभावना व्यक्त किया गया है। जिन केला के बागानों को अधिक क्षति हुई है, वहां पौधों और जड़ों की स्थिति देखकर दोबारा पौधा लगाने की आवश्यकता पड़ सकती है। लीची के पेड़ कुछ समय तक पानी में रहने को सहन कर सकते हैं। अभी ये प्रारम्भिक जानकारी है। फसल और किसानों की क्षति का सही आकलन करने के लिए खेतों का विस्तृत सर्वेक्षण करना आवश्यक है।
