
पटना :कृषि अनुसंधान परिसर, पटना ने पूर्णिया के धमदाहा गांव में कृषि जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया। किसानों में संतुलित उर्वरक उपयोग तथा मृदा स्वास्थ्य संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से दिनांक 22 मई 2026 को पूर्णिया जिला के धमदाहा प्रखंड स्थित धमदाहा गांव में एक जागरूकता अभियान आयोजित किया। यह कार्यक्रम भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना, कृषि विज्ञान केंद्र, पूर्णिया, बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर एवं बिहार कृषि विभाग के संयुक्त सहयोग से सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। कार्यक्रम में कुल 87 प्रतिभागी शामिल हुए, जिनमें 22 महिला एवं 65 पुरुष रहें। कार्यक्रम के क्रम में किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग, समेकित पोषक तत्व प्रबंधन तथा मृदा परीक्षण आधारित खेती की व्यवहारिक जानकारी प्रदान की गई। विशेषज्ञों ने बताया कि उर्वरकों का असंतुलित एवं अत्यधिक उपयोग मृदा स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाने के साथ-साथ उत्पादन लागत एवं पर्यावरणीय समस्याओं को बढ़ाता भी है। वैज्ञानिकों ने किसानों को सलाह दी कि वे रासायनिक उर्वरकों के साथ जैविक एवं हरित खादों का संतुलित उपयोग अपनाएं। कार्यक्रम में गोबर की खाद, कम्पोस्ट एवं हरी खाद के उपयोग से मिट्टी की संरचना, जलधारण क्षमता तथा सूक्ष्मजीव गतिविधियों में होने वाले सुधार पर विस्तार से चर्चा की गई। किसानों को ढैंचा एवं सनई जैसी हरित खाद फसलों की खेती के लिए प्रेरित किया गया। कार्यक्रम के क्रम में किसानों को गोबर की खाद के वैज्ञानिक प्रबंधन एवं उपयोग की तकनीकों की जानकारी भी दी गई। यह बताया गया कि ड्रोन तकनीक के माध्यम से उर्वरकों का छिड़काव करने से जल एवं उर्वरक दोनों की बचत होती है तथा कम समय में अधिक क्षेत्र में प्रभावी तरीके से कार्य किया जा सकता है।
इस अवसर पर भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना से डॉ. पवन जीत एवं डॉ. गौस अली सहित डॉ. के. एम. सिंह, प्रमुख, कृषि विज्ञान केंद्र, पूर्णिया, बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर, बिहार कृषि विभाग, नाबार्ड, इफको तथा जलजीविका के विशेषज्ञों एवं पदाधिकारियों ने किसानों के साथ संवाद स्थापित कर उनकी समस्या का समाधान सुझाया। कार्यक्रम में किसानों ने आधुनिक एवं टिकाऊ कृषि तकनीकों के प्रति विशेष अभिरुचि दिखाया।
