Wed. Jun 24th, 2026

पांच दिवसीय मशरूम उत्पादन प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रारंभ

रिपोर्ट अनमोल कुमार

लोहरदगा। जिला उद्यान पदाधिकारी,संतोष कुमार ने मशरूम प्रशिक्षण के प्रशिक्षणार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि मशरूम उत्पादन से महिला अपना जीवकोपार्जन कर सकती है।उद्यान विकास योजनान्तर्गत ए पी पी एग्रीगेट द्वारा लोहरदगा जिले के में 165 लाभुको कृषकों को प्रशिक्षण दिया गया। प्रखण्ड – पेशरार,ग्राम – तुईमु और प्रखण्ड – लोहरदगा के निगनी पंचायत भवन में दिया गया।
प्रशिक्षण के दौरान मशरूम उत्पादन के महत्व, मशरूम की आहार पौष्टिकता, मशरूम का औषधीय गुणों, वायस्टर मशरूम की खेती के तरीके, मशरूम फसल प्रबंधन, तुडाई और ऊपज सहित बाजारीकरण की जानकारी दी गई।
इस अवसर पर समूह चर्चा, समूहों द्वारा प्रस्तुतिकरण, प्रायोगिक काम भी कराया गया। इस अवसर पर ए पी पी एग्रीगेट के निदेशक, प्रभाकर कुमार ने कहा कि मशरूम उत्पादन से बहुउद्देशीय काम किया जा सकता हैं। फर्म के राज्य प्रमुख, अनमोल कुमार ने मशरूम प्रशिक्षण की उपयोगिता और लाभ की जानकारी दी। इस अवसर पर मुखिया, कमला देवी,उपमुखिया ,वीरेंद्र उरांव प्रधान, मोहन असुर प्रशिक्षिका,पूनम संगा, अनोखा कुमारी, गजाला परवीन , सामू महतो सी एफ जनजागरण केन्द्र,हजारीबाग आदि ने मशरूम उत्पादन के विभिन्न तरह की जानकारी दी।

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By Awadhesh Sharma

न्यूज एन व्यूज फॉर नेशन

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खेत बचाओ अभियान अंतर्गत भोजपुर जिला के दो गांव में किसानों को दिया प्रशिक्षण भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना द्वारा संचालित “खेत बचाओ अभियान” के अंतर्गत भोजपुर जिले के सहार प्रखंड के दो गांवों में किसानों के लिए जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, फसल सुरक्षा तथा मृदा स्वास्थ्य संरक्षण के प्रति जागरूक करना था। अभियान के अंतर्गत पहला कार्यक्रम धनछुआ गांव, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें कुल 30 किसानों ने भाग लिया। प्रतिभागियों में 27 पुरुष एवं 3 महिला किसान शामिल थीं। वहीं दूसरा कार्यक्रम कोनी गांव, चौरी पंचायत, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें 31 किसानों ने सहभागिता की। प्रशिक्षण कार्यक्रम में आईसीएआर-पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना से विशेषज्ञगण डॉ. पंकज कुमार, डॉ. मनोज कुमार त्रिपाठी तथा श्री ए.एस. महापात्रा मौजूद थे। साथ ही, कृषि विज्ञान केंद्र, आरा के विषय वस्तु विशेषज्ञ डॉ. विकास सिंह मौजूद थे। विशेषज्ञों ने किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का प्रयोग करने से फसलों को आवश्यक पोषक तत्व उचित मात्रा में प्राप्त होते हैं, जिससे उत्पादन लागत कम होती है तथा फसल की उत्पादकता में वृद्धि होती है। उन्होंने रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध उपयोग से बचने तथा एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन अपनाने पर बल दिया। कार्यक्रम के दौरान किसानों को हरित खाद के महत्व से भी अवगत कराया गया। वैज्ञानिकों ने बताया कि धैंचा एवं सनई जैसी फसलों का उपयोग हरित खाद के रूप में करने से मिट्टी में जैविक कार्बन एवं नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ती है, मृदा की संरचना में सुधार होता है तथा भूमि की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहती है। उन्होंने किसानों को खरीफ मौसम में धैंचा एवं सनई की खेती कर उन्हें खेत में पलटने की तकनीक एवं उसके लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम के दौरान किसानों की समस्याओं एवं जिज्ञासाओं का समाधान भी किया गया। किसानों ने प्रशिक्षण कार्यक्रम को अति उपयोगी बता, ऐसी जागरुकता गतिविधियों के निरंतर आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया