Fri. Mar 13th, 2026

रामायण को पढ़ने से कुम्भकर्ण का जो परिचय मिलता है। वह बड़ा विचित्र सा है। उसमें लिखा हैं। कि कुम्भकर्ण रावण का एक भाई था जो 6 महीने सोया करता था और जगाने जाने पर एक दिन के लिए उठता था और फिर सो जाता था। वास्तव में कुम्भकर्ण कोई संज्ञा वाचक नाम नही है। बल्कि लाक्षणिक नाम हैं जिस मनुष्य के कर्ण कान कुम्भ घडे के नाम हो वह व्यक्ति कुम्भकर्ण हैं। की विशेषता यह है। कि उसके मुख के पास यदि आप बोलो तो उसमें आवाज जायेगी तो सही और थोडी गूँजेगी भी परंतु कुम्भ वही का वही पड़ा रहेगा, उसमें आप का कहना फलीभूत नही होगा। माना लीजिए आप कहते है। जागो जागो आत्माओ ,भगवान अवतरित हो चुके है। उनसे आत्मिक नाता जोडकर सुख शांन्ति के भागी बनो तो यह कथन कुम्भ में जाकर थोड़ा प्रतिध्वनित तो होगा परन्तु उसमें धारणा नही होगी। घड़ा तो वही पड़ा रहेगा उसके लिए जागने का प्रश्न ही नही उठता। ठीक इसी प्रकार यदि कोई व्यक्ति ऐसे स्वभाव का है। कि कोई अच्छी और लाभदायक बात अथवा ज्ञान का कोई अनमोल रहस्य सुनने पर भी नही सुनता उसे क्रियान्वित नही करता तो मानो कि वह कुम्भकर्ण ही है।

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