Wed. Jun 24th, 2026

– – – पत्नी और बच्चों के चीत्कार से गांव में मातम

बेतिया:…..……….अरे….रजउ हो….. रजउ , हमनी के छोड़ के….… कहां गईल हो रजउ….. हृदय विदारक चीख, उसके बाद अचेत होती रही मृतक की पत्नी मुरत देवी। उनकी हृदय विदारक चीख-चीत्कार से गांव में शोक सदृश्य स्थिति है।

उल्लेखनीय है कि पश्चिम चम्पारण जिला के बगहा पुलिस अंतर्गत भैरोगंज थाना क्षेत्र के बांसगांव परसौनी निवासी भूतपूर्व वार्ड सदस्य 55 वर्षीय धर्मेंद्र पांडेय पिता स्वर्गीय मकरध्वज पांडेय मंगलवार की सुबह बासगांव निवासी वार्ड संख्या 3 के वार्ड सदस्य प्रतिनिधि रामप्रवेश सोनी के साथ बाइक से बगहा 01 प्रखण्ड कार्यालय गए। वहां से लौटने के क्रम में बगहा थाना क्षेत्र के रतनमाला के पास संध्या चार बजे एनएच 728 बी पर उनकी बाइक दुर्घटनाग्रस्त हो गई।। घटना कैसे घटी, इसका खुलासा नहीं हो सका है। घटना के समय बाईक रामप्रवेश चला रहे थे और पीछे धर्मेद्र पाण्डेय का बैठा होने की चर्चा की खबर भी है।  घटना की खबर सुन पहुंची पुलिस ने दोनों को चिकित्सार्थ बेतिया भेजा गया। प्राथमिक उपचार के बाद पांडेय को उत्कृष्ट चिकित्सा के लिए गोरखपुर भेजा गया। वहां चिकित्सा के दौरान पांडेय की मृत्यु हो गई। घायल बाइक सवार बेतिया में चिकित्सारत है।

गोरखपुर से शव बुधवार को घर पहुंचा तो बीवी, बच्चे व परिजनों में कोहराम मच गया। पूर्व वार्ड सदस्य चंदन शर्मा ने बताया कि मृतक का विवाह लगभग 33 वर्ष पूर्व रमगढ़वा के पास मुड़िला निवासी भगवान मिश्र के प्रथम पुत्री मूरत देवी से हुई । जिनके क्रमशः 25 वर्षीय शिखा कुमारी, 23 वर्षीय निक्की कुमारी, 21 वर्षीय सनी पांडेय, 19 वर्षीय रिक्की कुमारी और 17 वर्षीय जूही कुमारी संतान हैं।  बताया गया है कि बड़ी पुत्री शिखा विवाहिता है और दूसरी पुत्री निक्की का विवाह आगामी वर्ष में योजना रही, फिलहाल मृतक का सपना अधुरा रह गया। परिवार के भरण-पोषण करने वाले एकमात्र सदस्य धर्मेंद्र की पत्नी मुरत देवी का बुरा हाल है।

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By Awadhesh Sharma

न्यूज एन व्यूज फॉर नेशन

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खेत बचाओ अभियान अंतर्गत भोजपुर जिला के दो गांव में किसानों को दिया प्रशिक्षण भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना द्वारा संचालित “खेत बचाओ अभियान” के अंतर्गत भोजपुर जिले के सहार प्रखंड के दो गांवों में किसानों के लिए जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, फसल सुरक्षा तथा मृदा स्वास्थ्य संरक्षण के प्रति जागरूक करना था। अभियान के अंतर्गत पहला कार्यक्रम धनछुआ गांव, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें कुल 30 किसानों ने भाग लिया। प्रतिभागियों में 27 पुरुष एवं 3 महिला किसान शामिल थीं। वहीं दूसरा कार्यक्रम कोनी गांव, चौरी पंचायत, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें 31 किसानों ने सहभागिता की। प्रशिक्षण कार्यक्रम में आईसीएआर-पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना से विशेषज्ञगण डॉ. पंकज कुमार, डॉ. मनोज कुमार त्रिपाठी तथा श्री ए.एस. महापात्रा मौजूद थे। साथ ही, कृषि विज्ञान केंद्र, आरा के विषय वस्तु विशेषज्ञ डॉ. विकास सिंह मौजूद थे। विशेषज्ञों ने किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का प्रयोग करने से फसलों को आवश्यक पोषक तत्व उचित मात्रा में प्राप्त होते हैं, जिससे उत्पादन लागत कम होती है तथा फसल की उत्पादकता में वृद्धि होती है। उन्होंने रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध उपयोग से बचने तथा एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन अपनाने पर बल दिया। कार्यक्रम के दौरान किसानों को हरित खाद के महत्व से भी अवगत कराया गया। वैज्ञानिकों ने बताया कि धैंचा एवं सनई जैसी फसलों का उपयोग हरित खाद के रूप में करने से मिट्टी में जैविक कार्बन एवं नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ती है, मृदा की संरचना में सुधार होता है तथा भूमि की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहती है। उन्होंने किसानों को खरीफ मौसम में धैंचा एवं सनई की खेती कर उन्हें खेत में पलटने की तकनीक एवं उसके लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम के दौरान किसानों की समस्याओं एवं जिज्ञासाओं का समाधान भी किया गया। किसानों ने प्रशिक्षण कार्यक्रम को अति उपयोगी बता, ऐसी जागरुकता गतिविधियों के निरंतर आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया