Wed. Jun 24th, 2026

 

बेतिया: पश्चिम चम्पारण जिला के मझौलिया प्रखंड क्षेत्र के पिपरपाती पुल के पास हक हेल्थ केयर सेंटर का उद्घाटन मंजर हॉस्पिटल मोतिहारी के मुख्य निदेशक यूरोलॉजिस्ट एंड लेप्रोस्कोपिक सर्जन डॉ मंजर नसीम, मझौलिया हेल्थ केयर सेंटर के निदेशक डॉ महम्मद शमीम अख्तर, डॉ जुबैर आलम, डॉ अरसद अली, डॉ एम. ए. सलाम, डॉ सरफराज आलम ने संयुक्ततः फीता काटकर उद्घाटन किया। तदुपरांत दर्जनों रोगियों की जांच कर नि:शुल्क दवाएं वितरण किया। उन्होंने सम्बोधन में डॉ मंजर नसीम ने कहा कि तिरवाह क्षेत्र में चिकित्सा सेवा अनिवार्य है, जहाँ रात में रोगियों को काफी कठिनाई उठानी पड़ती है। इस तरह के क्षेत्र में चिकित्सा सेवा उपलब्ध होना गर्व की बात है। उन्होंने कहा कि गरीब, बेबस, लाचार, असहाय गरीबों की सेवा करना ईश्वर सेवा तुल्य माना गया है। फिजीशियन एवं सर्जन डॉ मोहम्मद शमीम अख्तर ने कहा कि प्रत्येक शुक्रवार को रोगियों का नि:शुल्क उपचार किया जाएगा। रोगियों के लिए 24 घंटे इमरजेंसी (आपातकालीन) सेवा इस अस्पताल में उत्तम व्यवस्था के साथ उपलब्ध रहेगी। डॉ अरशद अली ने बताया कि पिपरपाती चौक पर हक हेल्थ केयर सेंटर खुलने से पूर्वी एवं पश्चिम चम्पारण के रोगियों को चिकित्सा सुविधा उपलब्ध होगी। उन्हें शहरों की ओर नहीं जाना पड़ेगा। इस अवसर पर डॉक्टर तबस्सुम जहां, डॉक्टर मोहम्मद सरफराज आलम, जिला पार्षद मोहम्मद जियाउद्दीन, पूर्व जिला पार्षद शेख भोला, मोहसीन हाफिज, मुफ्ती जुनैद, शेख इजहार, मुहम्मद कासीम, नसीम आलम, हरेंद्र यादव, मोहम्मद यूनुस, पूर्व पार्षद अब्दुल सत्तार व अन्य उपस्थित रहे।

 

बबलू कुमार पटेल की रिपोर्ट….…

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By Awadhesh Sharma

न्यूज एन व्यूज फॉर नेशन

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खेत बचाओ अभियान अंतर्गत भोजपुर जिला के दो गांव में किसानों को दिया प्रशिक्षण भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना द्वारा संचालित “खेत बचाओ अभियान” के अंतर्गत भोजपुर जिले के सहार प्रखंड के दो गांवों में किसानों के लिए जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, फसल सुरक्षा तथा मृदा स्वास्थ्य संरक्षण के प्रति जागरूक करना था। अभियान के अंतर्गत पहला कार्यक्रम धनछुआ गांव, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें कुल 30 किसानों ने भाग लिया। प्रतिभागियों में 27 पुरुष एवं 3 महिला किसान शामिल थीं। वहीं दूसरा कार्यक्रम कोनी गांव, चौरी पंचायत, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें 31 किसानों ने सहभागिता की। प्रशिक्षण कार्यक्रम में आईसीएआर-पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना से विशेषज्ञगण डॉ. पंकज कुमार, डॉ. मनोज कुमार त्रिपाठी तथा श्री ए.एस. महापात्रा मौजूद थे। साथ ही, कृषि विज्ञान केंद्र, आरा के विषय वस्तु विशेषज्ञ डॉ. विकास सिंह मौजूद थे। विशेषज्ञों ने किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का प्रयोग करने से फसलों को आवश्यक पोषक तत्व उचित मात्रा में प्राप्त होते हैं, जिससे उत्पादन लागत कम होती है तथा फसल की उत्पादकता में वृद्धि होती है। उन्होंने रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध उपयोग से बचने तथा एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन अपनाने पर बल दिया। कार्यक्रम के दौरान किसानों को हरित खाद के महत्व से भी अवगत कराया गया। वैज्ञानिकों ने बताया कि धैंचा एवं सनई जैसी फसलों का उपयोग हरित खाद के रूप में करने से मिट्टी में जैविक कार्बन एवं नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ती है, मृदा की संरचना में सुधार होता है तथा भूमि की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहती है। उन्होंने किसानों को खरीफ मौसम में धैंचा एवं सनई की खेती कर उन्हें खेत में पलटने की तकनीक एवं उसके लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम के दौरान किसानों की समस्याओं एवं जिज्ञासाओं का समाधान भी किया गया। किसानों ने प्रशिक्षण कार्यक्रम को अति उपयोगी बता, ऐसी जागरुकता गतिविधियों के निरंतर आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया