Wed. Jun 24th, 2026

 

भारी वर्षापात देख बाढ़ का संकेत नियंत्रण कक्ष ने सतर्कता के प्रति सावधान किया


बेतिया: पश्चिम चम्पारण जिला और पड़ोसी राष्ट्र नेपाल स्थित गंडक नदी के जल अधिग्रहण क्षेत्र में लगातार हो रही वर्षापात से भारत नेपाल सीमा स्थित वाल्मीकिनगर गण्डक बराज से 1 लाख 26 हज़ार क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। उसके बाद गण्डक नदी के जलस्तर में तेजी से वृद्धि हुई है, तथा विभिन्न तटबंधों पर दबाव बढ़ा है। भारत नेपाल सीमा पर स्थित गण्डक बराज के कुल 36 फाटक खोल दिये गए हैं। इसके जल संसाधन विभाग के अभियंताओं को निगरानी के निर्देश प्रशासनिक स्तर पर दिया गया है। बराज नियंत्रण कक्ष में 4 शिफ़्ट में मॉनिटरिंग की जा रही है। पश्चिम चम्पारण जिला में तीन दिन से रुक-रुक और नेपाल में लगातार वर्षा हो रही है। बिहार समेत कई राज्यों में अगले 24 घन्टे में भारी वर्षा के अनुमान का संकेत मौसम विभाग ने दिया है। उधर भारत नेपाल सीमा स्थित गण्डक बराज के सभी फाटक खोलने से बिहार विशेषकर पश्चिम चम्पारण, पूर्वी चम्पारण, मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर में बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। जल संसाधन विभाग के अभियंताओं को निगरानी के आदेश दियागया हैं। उसके बाद बराज नियंत्रण कक्ष में 4 शिफ़्ट में मॉनिटरिंग की जा रही है। नेपाल में लगातार वर्षा से जनजीवन अस्त व्यस्त है, जिसका प्रभाव गंडक नदी के जलस्तर पर पड़ना सुनिश्चित है। उसके कारण गंडक नदी के तटीय क्षेत्रों में बाढ़ की संभावना बढ़ने के संकेत दे दिए गए हैं। गंडक नदी के जलस्तर में वृद्धि के दृष्टिगत नीचले क्षेत्र में में एकबार फिर बाढ़ की आशंका व्यक्त की गई है। इससे निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की मुश्किल बढ़ सकती है। सरकार और प्रशासन ने नीचले क्षेत्र वासियों को सुरक्षित स्थानों पर जाने का निदेश भी दिया है। सावधानी बरतने के रुप में गंडक बराज के कर्मी कर्त्तव्य निर्वहन में डटे हुए हैं। अभियंताओं की टीम भी चुस्त दुरुस्त निगरानी में हैं। जलस्तर बढ़ने के बाद बाढ़ प्रभावित क्षेत्र के लाेगाें के मन में भय व्याप्त है। उल्लेखनीय है कि वाल्मीकिनगर गंडक बराज की क्षमता 8 लाख क्यूसेक जल संग्रहण की है।

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By Awadhesh Sharma

न्यूज एन व्यूज फॉर नेशन

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खेत बचाओ अभियान अंतर्गत भोजपुर जिला के दो गांव में किसानों को दिया प्रशिक्षण भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना द्वारा संचालित “खेत बचाओ अभियान” के अंतर्गत भोजपुर जिले के सहार प्रखंड के दो गांवों में किसानों के लिए जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, फसल सुरक्षा तथा मृदा स्वास्थ्य संरक्षण के प्रति जागरूक करना था। अभियान के अंतर्गत पहला कार्यक्रम धनछुआ गांव, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें कुल 30 किसानों ने भाग लिया। प्रतिभागियों में 27 पुरुष एवं 3 महिला किसान शामिल थीं। वहीं दूसरा कार्यक्रम कोनी गांव, चौरी पंचायत, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें 31 किसानों ने सहभागिता की। प्रशिक्षण कार्यक्रम में आईसीएआर-पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना से विशेषज्ञगण डॉ. पंकज कुमार, डॉ. मनोज कुमार त्रिपाठी तथा श्री ए.एस. महापात्रा मौजूद थे। साथ ही, कृषि विज्ञान केंद्र, आरा के विषय वस्तु विशेषज्ञ डॉ. विकास सिंह मौजूद थे। विशेषज्ञों ने किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का प्रयोग करने से फसलों को आवश्यक पोषक तत्व उचित मात्रा में प्राप्त होते हैं, जिससे उत्पादन लागत कम होती है तथा फसल की उत्पादकता में वृद्धि होती है। उन्होंने रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध उपयोग से बचने तथा एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन अपनाने पर बल दिया। कार्यक्रम के दौरान किसानों को हरित खाद के महत्व से भी अवगत कराया गया। वैज्ञानिकों ने बताया कि धैंचा एवं सनई जैसी फसलों का उपयोग हरित खाद के रूप में करने से मिट्टी में जैविक कार्बन एवं नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ती है, मृदा की संरचना में सुधार होता है तथा भूमि की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहती है। उन्होंने किसानों को खरीफ मौसम में धैंचा एवं सनई की खेती कर उन्हें खेत में पलटने की तकनीक एवं उसके लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम के दौरान किसानों की समस्याओं एवं जिज्ञासाओं का समाधान भी किया गया। किसानों ने प्रशिक्षण कार्यक्रम को अति उपयोगी बता, ऐसी जागरुकता गतिविधियों के निरंतर आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया