Wed. Jun 24th, 2026

पटना : 29 मई 1953 को पहली बार माउंट एवरेस्ट पर मनुष्य ने चढ़ाई कर विजय प्राप्त किया। इसलिए विश्व स्तर पर 29 मई को अंतरराष्ट्रीय माउंट एवरेस्ट दिवस के रुप में मनाया जाता है। सोमवार को राजकीयकृत नवसृजित प्राथमिक विद्यालय दादरमंडी, गुलजारबाग, पटना में सहायक शिक्षक सूर्यकान्त गुप्ता के दिशा निर्देशन में छात्र-छात्राओ ने अंतरराष्ट्रीय माउंट एवरेस्ट दिवस मनाया। इस अवसर पर श्री गुप्ता ने अंतर्राष्ट्रीय माउंट एवरेस्ट दिवस को वर्ग 5 की पर्यावरण विज्ञान की पुस्तक ‘पर्यावरण और हम’, भाग-3 के अध्याय ‘पटना से नाथुला की यात्रा’ से जोड़कर छात्र-छात्राओं को माउंट एवरेस्ट, तेनजिंग नोर्गे शेरपा, पर्वतारोहण की तैयारी से जुड़े तथ्यों के बारे में विस्तृत जानकारी दिया उन्होंने बताया कि विश्व की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट पर पहली बार 29 मई 1953 ई. को तेनजिंग नोर्गे शेरपा तथा एडमंड हिलेरी ने चढ़ने में सफलता प्राप्त किया। इसलिए प्रतिवर्ष 29 मई को अंतरराष्ट्रीय माउंट एवरेस्ट दिवस मनाया जाता है।

माउंट एवरेस्ट की ऊंचाई 8848.86 मीटर है, यह भारत के पड़ोसी मित्र राष्ट्र नेपाल के उत्तर सीमा पर अवस्थित है। नेपाल में माउंट एवरेस्ट को सगरमाथा तथा तिब्बत में चोमोंलोंगमा कहा जाता है। माउंट एवरेस्ट पर सफलता प्राप्त करने वाले प्रथम भारतीय पुरुष लेफ्टिनेंट कर्नल अवतार एस चीमा तथा प्रथम महिला बछेंद्री पाल हैं। संतोष यादव ने दो बार एवरेस्ट पर चढ़ने में सफलता प्राप्त किया। बिहार की निरुपमा अग्रवाल ने एवरेस्ट पर चढ़ने में सफलता प्राप्त किया है। माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने में सफलता प्राप्त करने वाली पहली विश्व की पहली महिला जुंको ताबेइ हैं। इस कार्यक्रम को सफल बनाने में जितेंद्र कुमार ने का प्रशंसनीय योगदान रहा है।

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By Awadhesh Sharma

न्यूज एन व्यूज फॉर नेशन

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खेत बचाओ अभियान अंतर्गत भोजपुर जिला के दो गांव में किसानों को दिया प्रशिक्षण भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना द्वारा संचालित “खेत बचाओ अभियान” के अंतर्गत भोजपुर जिले के सहार प्रखंड के दो गांवों में किसानों के लिए जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, फसल सुरक्षा तथा मृदा स्वास्थ्य संरक्षण के प्रति जागरूक करना था। अभियान के अंतर्गत पहला कार्यक्रम धनछुआ गांव, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें कुल 30 किसानों ने भाग लिया। प्रतिभागियों में 27 पुरुष एवं 3 महिला किसान शामिल थीं। वहीं दूसरा कार्यक्रम कोनी गांव, चौरी पंचायत, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें 31 किसानों ने सहभागिता की। प्रशिक्षण कार्यक्रम में आईसीएआर-पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना से विशेषज्ञगण डॉ. पंकज कुमार, डॉ. मनोज कुमार त्रिपाठी तथा श्री ए.एस. महापात्रा मौजूद थे। साथ ही, कृषि विज्ञान केंद्र, आरा के विषय वस्तु विशेषज्ञ डॉ. विकास सिंह मौजूद थे। विशेषज्ञों ने किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का प्रयोग करने से फसलों को आवश्यक पोषक तत्व उचित मात्रा में प्राप्त होते हैं, जिससे उत्पादन लागत कम होती है तथा फसल की उत्पादकता में वृद्धि होती है। उन्होंने रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध उपयोग से बचने तथा एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन अपनाने पर बल दिया। कार्यक्रम के दौरान किसानों को हरित खाद के महत्व से भी अवगत कराया गया। वैज्ञानिकों ने बताया कि धैंचा एवं सनई जैसी फसलों का उपयोग हरित खाद के रूप में करने से मिट्टी में जैविक कार्बन एवं नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ती है, मृदा की संरचना में सुधार होता है तथा भूमि की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहती है। उन्होंने किसानों को खरीफ मौसम में धैंचा एवं सनई की खेती कर उन्हें खेत में पलटने की तकनीक एवं उसके लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम के दौरान किसानों की समस्याओं एवं जिज्ञासाओं का समाधान भी किया गया। किसानों ने प्रशिक्षण कार्यक्रम को अति उपयोगी बता, ऐसी जागरुकता गतिविधियों के निरंतर आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया