Tue. Jun 23rd, 2026

छत्तीसगढ़  के दुर्ग जिला  में सुपेला   रेलमार्ग पर एक महिला खुदकुशी करने के लिए बैठी हुई थी। जैसे ही इसकी जानकारी  मिली  तो डायल 112 को किया , वह   जल्दी तुरंत  पर पहुंचे । टीम ने महिला को पकड़कर वहां से थाने ले गई और समस्या का समाधान  के बाद उसे घर भेजा। अगर समय पर कॉल नहीं करती तो  112 की टीम वहां नहीं पहुंचती तो महिला की जान जा सकती थी। भट्ठी टीआई के.के. कुशवाहा ने बताया कि सोमवार लगभग दोपहर  की बात  कॉल 112 में एक घटना प्राप्त हुआ था। फोन करने वाले ने बताया कि एक महिला सुपेला रेलवे क्रॉसिंग के पास रेल पटरी में बैठी है। शायद वो खुदकुशी करने जा रही है

सूचना मिलते ही कॉल  किया 112 में पदस्थ आरक्षक सोमेश कुमार एवं चालक अश्वनी प्रभाकर बिना समय गंवाए 5 मिनट में मौके पर पहुंचे। उन्होंने देखा कि महिला रेलवे ट्रैक पर अकेली बैठी है। दोनों धीरे से महिला के पास पहुंचे तो वो वहां से जाने लगी। पुलिसवालों ने उसे पकड़कर पूछताछ किया तो उसने बताया कि वो खुदकुशी करने के लिए ट्रेन आने का इंतजार कर रही थी। इसके बाद पुलिसवालों ने महिला को समझाया और अपने साथ थाने लेकर गई। कॉल 112 की  बात चित  का समस्या का समाधान और उत्साह  से महिला की जान बच गई।

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खेत बचाओ अभियान अंतर्गत भोजपुर जिला के दो गांव में किसानों को दिया प्रशिक्षण भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना द्वारा संचालित “खेत बचाओ अभियान” के अंतर्गत भोजपुर जिले के सहार प्रखंड के दो गांवों में किसानों के लिए जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, फसल सुरक्षा तथा मृदा स्वास्थ्य संरक्षण के प्रति जागरूक करना था। अभियान के अंतर्गत पहला कार्यक्रम धनछुआ गांव, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें कुल 30 किसानों ने भाग लिया। प्रतिभागियों में 27 पुरुष एवं 3 महिला किसान शामिल थीं। वहीं दूसरा कार्यक्रम कोनी गांव, चौरी पंचायत, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें 31 किसानों ने सहभागिता की। प्रशिक्षण कार्यक्रम में आईसीएआर-पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना से विशेषज्ञगण डॉ. पंकज कुमार, डॉ. मनोज कुमार त्रिपाठी तथा श्री ए.एस. महापात्रा मौजूद थे। साथ ही, कृषि विज्ञान केंद्र, आरा के विषय वस्तु विशेषज्ञ डॉ. विकास सिंह मौजूद थे। विशेषज्ञों ने किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का प्रयोग करने से फसलों को आवश्यक पोषक तत्व उचित मात्रा में प्राप्त होते हैं, जिससे उत्पादन लागत कम होती है तथा फसल की उत्पादकता में वृद्धि होती है। उन्होंने रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध उपयोग से बचने तथा एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन अपनाने पर बल दिया। कार्यक्रम के दौरान किसानों को हरित खाद के महत्व से भी अवगत कराया गया। वैज्ञानिकों ने बताया कि धैंचा एवं सनई जैसी फसलों का उपयोग हरित खाद के रूप में करने से मिट्टी में जैविक कार्बन एवं नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ती है, मृदा की संरचना में सुधार होता है तथा भूमि की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहती है। उन्होंने किसानों को खरीफ मौसम में धैंचा एवं सनई की खेती कर उन्हें खेत में पलटने की तकनीक एवं उसके लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम के दौरान किसानों की समस्याओं एवं जिज्ञासाओं का समाधान भी किया गया। किसानों ने प्रशिक्षण कार्यक्रम को अति उपयोगी बता, ऐसी जागरुकता गतिविधियों के निरंतर आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया